यही पाकिस्तान की हकीकत है

बुधवार को पाकिस्तान कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समन्वय समिति ने जून से हमारे देश से कॉटन और चीनी आयात करने का निर्णय लिया था. जिसे कट्टर पंथियों के दबाव में पाकी कैबिनेट ने गुरुवार को पलट दिया. कारण कट्टरपंथी  इस बात को हजम ही नहीं कर पा रहे हैं कि पाक और हमारे रिश्ते समान्य हों सकते हैं. उनकी तो पूरी दुकान ही बंद हो जायेगी. उनका अस्तित्व ही हमारा विरोध है,हमारा द्वेष है और जिसे अभी हाल में इमरान को लिखे पत्र में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेखांकित किया है कि दोनों देशों में विश्वास और भरोसा तभी बढ़ेगा जब उनके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद खत्म होगा और द्वेष का कोई स्थान नहीं होगा.पाक को किसी भी कारण से सद्बुद्धी आयी. सीज फायर का उल्लंघन  ना  करने पर सहमति हुई, उसका पालन भी हो रहा है, अच्छी  बात है. हमने भी सकारात्मक प्रतिसाद देना शुरू किया. इमरान को अपने क्षेत्र से श्रीलंका जाने की इजाजत दी. प्रधान मंत्री ने भी उनके राष्ट्रीय दिवस पर उन्हें बधाई दी. उसके बाद पाक का यह फैसला  सामने आया कि वह कॉटन और चीनी  का आयात करेगा और फिर वह पलट दिया गया.पाकिस्तान से डील करने में यही सबसे बड़ी समस्या है, वह जो  कहता है, करता है, उस पर अडिग नहीं रहता, जिस की कथनी और करनी में इस तरह का फर्क हो उससे कैसे निपटा जाय, उस पर कैसे भरोसा किया जाय, यह यक्ष प्रश्न है और इसका जिक्र प्रधानमंत्री भी कई बार कर चुके हैं कि वहां बात किससे की जाय यही नहीं पता चलता, जो सही भी है.  देश का प्रतिनिधितिव चुनी हुई सरकार करती है. उसका मुखिया आम सहमति से फैसले लेता है. परन्तु पाक में यह अलग है. उसपर नियन्त्रण किसी का है, कट्टर पंथियों का है, सेना का है, पता ही नहीं चलता. परिणाम उपरोक्त आगा-पीछी के रूप में सामने आता है तो जब तक पाक में ऐसे खेल नहीं बंद होते तब तक उसके साथ िरश्ते सामान्य होंगे नहीं लगता. एक बात और जो काबिले गौर है, वह यह की सीमा पर सीज फायर उल्लंघन की घटनाएं  बंद हुई है, लेकिन घाटी में आतंकी गतिविधियों में एक बार पुन तेजी आयी है, जिसका हमरी सुरक्षा एजेंसियां यथोचित बंदोबस्त भी  कर  रहीं हैं. इस पर इस दृिष्ट से देखना भी जरूरी है कि कहीं पाक में बैठे हमारे चिर अशुभ चिंतक जो इस तरह के खेल  में िसद्धहस्त है तो कुछ तो नहीं कर रहे हैं. कारण पाक जैसी फितरत वाला राष्ट्र जल्दी राह पर नहीं आता और आज जो वह राह पर आता दिख रहा है, उसका कारण हमारी असंदिग्ध चेतवानी ही नहीं, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक्स जैसी कार्रवाइयां हैं, जिसने उसे दिन में भी तारे दिखाते हुए यह एहसास दिलाया है कि यदि आग से खेलोगे तो सिर्फ राख बनोगे. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी अछूत जैसी स्थिति और आर्थिक बदहाली और एफएटीएफ जैसे संगठनों का दबाव उसे सही राह पर चलता दिखने के लिए बाध्य कर रहा है. संकेत साफ़ है िक वह यह सब अपनी इच्छा से नहीं कर रहा है. दबाव के चलते दिखावा कर रहा है, जिसे हम भी बखूबी समझ रहे हैं. इसलिए उसकी हर चाल पर हमारी बारीक नजर है. कारण हम उसे आज से नहीं उसके जन्म से जानते हैं. उसकी कथनी और करनी में हमेशा फर्क रहा है, उसकी दोस्ती में भी छलावा रहा है. उसे इस बार अपने इस ढोंगी स्वरुप को त्याग कर इमानदारी से आगे आना होगा, उसे अपनी आज की हकीकत वाली नीतियों को छोड़कर, जिसमे फरेब है,  मुंह में राम बगल में छुरी है का परित्याग कर इमानदारी से रिश्ते समान्य करने की पहल करनी होगी तब तो बात बनेगी, नहीं तो आज का भारत यह जानता है की उसे कैसी ठीक करना और यदि उसने कोई खुराफात की तो उसका सटीक और प्रभावी जबाब मिलेगा यह तय है. पाक को यदि लगता है कि वह हमें लेकर पुराने तौर तरीके पर ही कायम रहा सकता है तो वह भयनक मुगालते में है. कारण आज का भारत बदल चुका है और वह जैसे को तैसा जबाब नहीं, बल्कि उससे बहुत ज्यादा जबाब देना शुरू कर चुका है.


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