कभी बीआरडी पर था पूरा भार अब जिलों में ही मुकम्मल उपचार

गोरखपुर

चार साल पहले तक पूर्वांचल के माथे पर बीमारू का कलंक यूं ही नहीं था। योगी की सरकार के पहले गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों के अलावा आजमगढ़, मऊ, बिहार व नेपाल के सीमाई इलाकों की चिकित्सा सुविधाओं का सारा दारोमदार अकेले गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज पर ही था। 1977 से पूर्वी उत्तर प्रदेश पर कहर बरपाती इंसेफेलाइटिस महामारी और इतनी बड़ी आबादी, उस पर इलाज का एकमात्र केंद्र बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही था। सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद हालात अब बिलकुल बदल चुके हैं। उनके नेतृत्व में पूर्वांचल को विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं वाले गोरखपुर एम्स की सौगात मिली है। 

बस्ती, सिद्धार्थनगर और देवरिया में मेडिकल कॉलेज तकरीबन बन गए हैं। कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण प्रक्रियाधीन है, तो बाकी दो जिलों महराजगंज और कुशीनगर में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने का बजट में ऐलान कर दिया गया है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं की बेहतरी को लेकर योगी आदित्यनाथ अपने लगातार पांच बार के संसदीय कार्यकाल में लोकसभा में यहां के लोगों की आवाज उठाते रहे। गोरखपुर में 1000 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना का श्रेय उन्हीं को जाता है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यह बात कह चुके हैं। 

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