मरीजों के ऑक्सीजन प्रबंधन में जुटी सरकार

पटना

तेजी से फैलते संक्रमण के चलते ऑक्सीजन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में सरकार ने अब ऑक्सीजन का प्रबंधन दुरुस्त करने की कवायद शुरू की है। इस मुहिम में उद्योग और स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रशासन और पुलिस भी जुटेंगे। परिवहन विभाग की भी मदद ली जाएगी। इंडस्ट्रियल सप्लाई रोककर पहले सारी ऑक्सीजन मरीजों के इलाज में प्रयोग होगी। बिहार में कच्चा माल यानी क्रूड लिक्विड ऑक्सीजन अधिकांशत: झारखंड से आती है। उद्योग विभाग झारखंड के लिक्विड ऑक्सीजन निर्माता कंपनी और बिहार के ऑक्सीजन सप्लायरों के बीच सेतु का काम करेगा। इसके लिए विभाग ने बोकारो स्थित प्लांट संचालकों से भी बात की है। उनका कहना है कि क्रूड लिक्विड ऑक्सीजन से भी ज्यादा संकट उन्हें ले जाने वाले टैंकरों का है। इसलिए टैंकरों की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी।

यह काम परिवहन विभाग की मदद से किया जाएगा। कॉम्फेड के लिक्विड नाइट्रोजन गैस वाले टैंकरों को भी इसके लिए प्रयोग में लाया जाएगा। प्रशासन अन्य टैंकरों की भी व्यवस्था लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई दुरुस्त करने के लिए करेगा। वहीं उद्योग विभाग ने पटना सहित बिहार के दूसरे ऑक्सीजन सप्लायरों से भी बात की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि क्रूड लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई दुरुस्त होने पर ऑक्सीजन तैयार कर सिलेंडरों की फिलिंग का काम तेजी से कर पाएंगे। ताकि मांग के अनुरूप सप्लाई की जा सके। स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों को होने वाली ऑक्सीजन सिलेंडरों की सप्लाई पर नजर रखेगा। मांग के अनुरूप सिलेंडरों की उपलब्धता के साथ ही उसका दुरुपयोग न होने पाए, यह भी विभाग देखेगा। पुलिस-प्रशासन जहां झारखंड से कच्चे माल की आवाजाही को सुगम बनाने में मदद करेगा। वहीं किसी डीलर द्वारा स्टॉक या कालाबाजारी रोकने को भी कदम उठाएगा। प्लांटों पर यह भी नजर रखी जाएगी कि वो फिलहाल अस्पतालों के अतिरिक्त औद्योगिक सप्लाई के लिए ऑक्सीजन सिलेंडरों की सप्लाई ना करें।


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