भारत की मदद को दौड़े विदेशी मुल्क

biden modi

नई दिल्ली

भारत में कोरोना महामारी के तांडव को नकेल लगाने के लिए भारत की तरफ कई विदेशी मुल्कों ने हाथ बढ़ाया है, जिससे समझा जा रहा है कि कोरोना को जल्द ही मात दी जा सकेगी। मेडिकल इक्विपमेंट्स से लेकर ऑक्सीजन और जरूरी दवाइयों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। ब्रिटेन से 100 वेंटिलेटर और 95 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स दिल्ली पहुंचे। इसके अलावा फ्रांस ऑक्सीजन जेनरेटर भेज रहा है, जो कि 250 मरीजों को गैस की आपूर्ति कर सकता है।

भारत को मदद करने वालों में चीन भी शामिल है, जिसके साथ हाल के दिनों में रिश्तों में तल्खी आ गई थी। चीन ने कहा कि वह अपने पड़ोसी देश को चिकित्सा आपूर्ति प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। दूतावास के प्रवक्ता वांग ज़ियाओजियान ने एक बयान में कहा, हम चीनी कंपनियों को भारत के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित और मार्गदर्शन करेंगे।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी भारत की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं। उन्होंने हिंदी में अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'हम जिस महामारी से गुज़र रहे हैं, कोई इससे अछूता नहीं है। हम जानते हैं कि भारत एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। फ्रांस और भारत हमेशा एकजुट रहे हैं। हम अपनी सहायता प्रदान करने के लिए तत्परता से जुट रहे हैं। फ्रांस भारत को मेडिकल उपकरण, वेंटीलेटर और ऑक्सीजन तथा 8 ऑक्सीजन जेनरेटर भेजेगा। प्रत्येक जेनरेटर परिवेशी वायु से ऑक्सीजन का उत्पादन करके एक अस्पताल को 10 साल तक आत्मनिर्भर बना सकता है। हमारी फ्रांसीसी कंपनियां लामबंद हो रही हैं और वे पहले से अधिक संख्या में मौजूद हैं! एकजुटता हमारे राष्ट्र के केंद्र में है। यह हमारे देशों के बीच मित्रता के केंद्र में है। हम एक साथ मिलकर जीतेंगे।' 

थाईलैंड ने बढ़ाया हाथ 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि देश में चिकित्सीय ऑक्सीजन के परिवहन के लिए कंटेनरों की एक खेप थाईलैंड से भारत पहुंच गई है, जबकि सिंगापुर से कुछ और खाली टैंकर वायु मार्ग से मंगाए जा रहे हैं। देश में कोरोना संकट की गंभीर स्थिति के बीच ऑक्सीजन की मांग बढ़ने के मद्देनजर गृह मंत्रालय की ओर से वायुसेना के परिवहन विमान से खाली कंटेनरों की यह तीसरी खेप मंगाई गई है। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने ट्वीट कर कहा, ''...बैंकॉक से कंटनेरों को हवाई मार्ग से लाया गया है। इनको लाने के काम में गृह मंत्रालय की ओर से समन्वय किया जा रहा है। मंत्रालय ने एक अन्य ट्वीट में कहा, '' भारतीय वायुसेना का सी17 परिवहन विमान आज सिंगापुर से और खाली ऑक्सीजन कंटेनरों को एयरलिफ्ट करने के लिए तैयार है। इन कंटेनरों से देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।''


कोरोना से लड़ने का हथियार देगा अमेरिका

कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की मदद के लिए अमेरिका मिशन मोड में आ गया है। अमेरिकी प्रशासन की विभिन्न शाखाएं उन क्षेत्रों की पहचान में जुट गई हैं, जिनमें भारत को मदद की जरूरत है। इसके अलावा सभी प्रशासनिक बाधाओं को भी दूर किया जा रहा है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारत को जितनी जल्दी संभव हो चिकित्सकीय मदद मुहैया करा दी जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि भारत ने अमेरिका के लोगों की जरूरत के समय मदद की थी। अब अमेरिका कोरोना वायरस से लड़ने में भारत की सहायता करेगा और संसाधन उपलब्ध कराएगा। भारत के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए अमेरिका की 40 शीर्ष कंपनियां सामने आई हैं। इसके तहत भारत की मदद करने के लिए संसाधन एकत्रित करने की खातिर एक वैश्विक कार्यबल का गठन किया जाएगा। डेलाइट के सीईओ पुनीत रंजन ने बताया कि अमेरिका के विभिन्न व्यापार संगठन मिलकर कुछ सप्ताह में 20,000 आक्सीजन कंसंट्रेटर भारत भेजेंगे। इसके अलावा ये कंपनियां प्रशासन के साथ मिलकर दवाएं, वैक्सीन, आक्सीजन और अन्य जीवन रक्षक उपकरण भी भेजेंगी। रंजन ने बताया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियां सप्ताहांत में सामने आई हैं। हमसे जो भी मदद बन पड़ेगी, उसे करने का हम सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं। दवा निर्माता कंपनी गिलियड साइंसेज ने कहा है कि वह कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित भारत में रेमडेसिविर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अपने सहयोगियों को तकनीकी मदद और दवा में प्रयुक्त होने वाली सामग्री उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा कंपनी भारत को 4,50,000 अतिरिक्त वायल मुहैया कराएगी। रूस की स्पूतनिक v  की पहली खेप संभवतः एक मई को भारत पहुंच जाएगी।


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