नाइट कर्फ्यू से संकट में होटल व्यवसाय

रुका कारोबार तो बेरोजगारी बढ़ने के आसार

hotel

मुंबई

वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पिछले साल लगाए गए लॉकडाउन में लगभग सात महीने तक होटल पूरी तरह से बंद थे। इसके चलते इन होटलों में काम करने वाले हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे। राज्य सरकार ने अनलॉक योजना के तहत एसओपी बनाकर इन होटलों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी थी। लेकिन प्रदेश सहित मुंबई में एक बार फिर से कोरोना की दूसरी लहर के चलते शाम आठ बजे से सुबह सात बजे तक कर्फ्यू लगा दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल व्यवसाय पर देखने को मिल रहा है जहां लोग रात में डिनर करने आते हैं। यही नहीं यहां काम करने वाले कर्मचारियों पर भी बेरोजगारी की तलवार लटकती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार और मनपा को लायसेंस शुल्क के रूप में अच्छी खासी रकम देने वाला होटल व्यवसाय आज किंकर्तव्यविमूढ़ नजर आ रहा है। इसी मुद्दे पर कई होटल कारोबारियों ने अपने विचार 'हमारा महानगर' के साथ साझा किए।
समय सीमा बढ़ानी चाहिए
सरकार को अन्य कड़े प्रतिबंधों को विकल्प के रूप में लगाना चाहिए। होटल का व्यवसाय शाम आठ बजे से ही शुरू होता है। दिन में नाम मात्र का कारोबार होता है। सरकार को होटल चालू रखने की समय सीमा बढ़ानी चाहिए। वैसे भी हम एसओपी के तहत ही सीटिंग व्यवस्था अरेंज कर रहे हैं।
- गुणापाल शेट्टी, होटल कारोबारी अंधेरी    

...तो बेरोजगारी बढ़ेगी
पिछले साल की बंदी से होटल कारोबारियों की कमर टूटी हुई है। थोड़ी से गाड़ी पटरी पर आ रही थी कि फिर से कर्फ्यू ने समस्या पैदा कर दी है। होटल बंद हुए तो इसमें काम करने वाले बेरोजगार हो जाएंगे और पलायन कर जाएंगे। दिन की भीड़भाड़ से यदि कोरोना नहीं फ़ैल रहा तो क्या रात की सीमित भीड़ से विस्फोट हो जाएगा।

- डॉ. सतीश शेट्टी, उपाध्यक्ष आहार


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