आपदा में मुनाफाखोरी नहीं

यह आपदा का समय है। कोरोना एक बार फिर पूरे उफान पर है। लोगों पर कहर बरपा रहा है। इस पर लॉकडाउन का काउंट डाउन भी शुरू है। लोग एक और महामारी के चपेट में ना आने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, तो बहुतों के सर पर रोजी-रोटी जाने का भी ख़तरा मडराना शुरू हो गया है।  पिछले लॉकडाउन में देश भर में किस तरह जहां देखो वहीं लॉन्ग मार्च जैसा दृश्य नजर आ रह था, यह सबको पता है। लोग कितने परेशानी और पीड़ा झेल कर अपने मूल गांव यह शहर पहुंचे थे यह सब जानते हैं। अब एक बार फिर लोग बेचैन हो रहे हैं, जितना जल्दी हो सुरक्षित मुकाम पर पहुंचना चाहते हैं। स्वाभाविक है कि रेल स्टेशनों पर भीड़ दिखनी शुरू हो गयी है। अब टिकट के लिए मारामारी शुरू हो रही है। गाड़ियों की एक मर्यादा है टिकट ना मिलने से लोग दलालों के चक्कर में पड़ रहे हैं, जो टिकट से कई गुना ज्यदा वसूली कर टिकट दे रहे हैं, ऐसी बातें सुर्ख़ियों में आ रही है। यहीं नहीं रिमेडंसीवीर इंजेक्शन को लेकर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को देश भर में मिला कि निहित स्वार्थी तत्वों ने अनाप-शनाप पैसा लेना शुरू कर दिया.  जिस पर देश भर में तीखी प्रतिक्रया हुई और अब केंद्र सरकार ने उसके  निर्यात पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकारें भी हरकत में आयी है और वह वाजिब दाम पर लोगों को उपलब्ध हो इस दिशा में कदम उठाना शुरू किया गया है। यह दो उदाहरण ऐसे हैं, जिसमें एक में तो सरकार ने त्वरित कारवाई की है। रेलवे भी अपनी और से लोगों को तकलीफ ना हो इस दिशा में सतत काम कर रही है, लेकिन उसका प्रयास अभी भी नाकाफी लग रहा है। आवश्यक है,  वह वैसी  मुस्तैदी दिखाए, जिससे लोग को जो  दलालों के मार्फ़त लूटा जा रहा है या हलाकान  किया जा रहा है,  उस पर रोक लगे। कारण रोड या हवाई यात्रा का विकल्प हर व्यक्ति नहीं चुन सकता। कारण दोनों रेल की तुलना में काफी महंगे हैं, जिसके रोजी रोटी की लाले हों वह खर्चीला विकल्प नहीं चुन सकता। वैसे भी गरमी के सीजन में सामान्य समय में मुंबई से देश के हर क्षेत्र की ओर विशेषकर उत्तर की ओर जाने वाले गाड़ियों में टिकटों की मारामारी रहती थी। कारण इस दौरान बच्चों की छुट्टियां  होती है और गांव में तमाम अन्य मांगलिक कार्य भी होते हैं। इस बार तो लॉकडाउन की आहट है और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव भी है इससे जाने वालों की संख्या ज्यादा है। आवश्यक है इस स्थित  को ध्यान में रखकर रेल प्रशासन ऐसा बंदोबस्त करें कि आम जन को परेशानी कम से कम हो और उन्हें आसानी से टिकट मिल सके और उनका उत्पीड़न ना हो। बड़ी मुश्किल से लोग वापस आये थे अभी पांव जमने  ही न पाए थे, तो फिर महामारी संकट मं डाल रही है और पलायन को मजबूर कर रही है। 

साथ ही इस संकट के समय लोगों की परेशानी को अपने लिए लाभ का अस्त्र बनाने वाले, कालाबाजारी करने वाले लोगों पर हो रही कार्रवाई को और तेज और सख्त करने की भी जरूरत है। कारण यह काल आपदा काल है। हम यदि किसी का सहयोग नहीं कर सकते, तो कम से कम उसकी परेशानी में और इजाफा तो ना करें। बावजूद इसके यदि लोग इसे गलत और अनुचित कमाई के अवसर में तब्दील कर रहे हैं, तो उन पर सख्त कार्रवाई वक्त की मांग है। इस बार मदद के लिए भी हाथ पहले लॉकडाउन की तुलना  में कम सामने आ रहे हैं।  यह भी चिंता की बात है। आवश्यक है कि हर सक्षम व्यक्ति  इस पर विचार करे और लोगों की सहायता के लिए आगे आए। आपदा कुछ दिन की है इसमें हमें अपनी मानवता नहीं छोड़नी है। इसे लोगों का शोषण काऔजार नहीं बनाना है, बल्कि हर व्यक्ति सुरक्षित रहे और उसकी परेशानी कम से कम हो इस और जो कर सकते हैं करना है। एक-दूसरे के सहयोग से हम बड़ी से बड़ी चुनौती को मात दे सकते हैं। हमने इसे पिछले लॉकडाउन के समय भी अपने आत्मनुशासन अपने संयम और सहयोग से महामारी को पीछे जाने को मजबूर किया था और इस बार भी इसे हराएंगे और देश और दुनिया से हटाएंगे। आइए मानवता का अलख जगाते हुए इसका सामना करें। इसी मं सबका भला है, सबका कल्याण है। एकता और ईमानदारी से बड़ी-बड़ी चुनौतियों पर विजय पायी जा सकते ह। हम ईमानदारी से अपना कार्य करं, महामारी पर  विजय नि‌िश्चत हंै।

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