कोरोना के चलते बंद हुए बाजार

कपड़ा व्यापारियों का चौपट कारोबार  । शादी-विवाह के सीजन में लगा जोर का झटका

cloth store

मुंबई 

कोरोना की दूसरी लहर ने जहां जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है, वहीं बाजार बंद होने से पटरी पर लौट रहा कारोबार फिर से चौपट होने की कगार पर दिखाई दे रहा है। 

पिछले साल लॉकडाउन में कई महीनों की बंदी के बाद किसी तरह उबरता बाजार एक बार फिर से बंदी से प्रभावित होने वाला है। भीड़- भाड़ रोकने के लिए सरकार ने जहां शुक्रवार शाम से सोमवार सुबह तक लॉकडाउन लगा दिया है, वहीं आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है। वैसे तो इस बंदी का असर सभी कारोबार पर पड़ने वाला है, लेकिन सबसे ज्यादा असर कपड़ों की दुकानों पर पड़ने वाला है। 

गौरतलब हो कि अप्रैल से जून तक शहर से लेकर गांवों तक शादी विवाह का सीजन रहता है, जिसके लिए लोग एक महीने पहले से ही खरीददारी करते हैं। कपड़े की दुकानें बंद होने से व्यापारियों के साथ आम आदमी को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। मुंबई के थोक कपड़ा बाजार कालबादेवी की सभी दुकानें बंद होने से खुदरा व्यापारियों को माल नहीं मिल पा रहा है। इससे सभी दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी बेरोजगार होने का खतरा बढ़ गया है. इसका असर ग्राहकों पर भी देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल, मई में गांव जाने वाले उत्तर भारतीयों के साथ प्रदेश के मराठी भाषी  भी कपड़ों की इसी मौसम में खरीददारी करते हैं लेकिन दुकानें बंद होने से उनके सामने भी समस्या उत्पन्न हो गई है।

चुनौती बढ़ गई है 

पिछले साल कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन से काफी नुकसान उठाना पड़ा था। अनलॉक होने के बाद अब गाड़ी पटरी पर लौट रही थी, लेकिन दूसरी बंदी से चुनौती बढ़ गई है। बंदी के बावजूद अनेक प्रकार के खर्चे जारी रहते हैं, जिसकी भरपाई करना मुश्किल होगा। 

- विजय कुमार लोहिया, अध्यक्ष भारत मर्चेंट चेंबर

स्टॉक का क्या होगा 

हमने सीजन की मांग को देखते हुए कपड़ों का स्टॉक जमा कर लिया था, लेकिन बंदी से घर बैठना पड़ गया है। इसके साथ व्यापारियों के साथ लेनदेन भी बंद हो जाएगा। हालंकि सबसे ज्यादा भीड़ तो सड़कों पर लगने वाली दुकानों पर लगती है लेकिन कपड़ों की दुकानों को बंद करने का फैसला समझ में नहीं आ रहा है।

- पंकज सिंघल, थोक 

कपड़ा व्यापारी

कमर ही टूट जाएगी 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दुकानों को बंद करने से व्यापारियों कारोबार के साथ व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। शायद ही किसी को पता हो कि कपड़ा कारोबार में उत्पादन से लेकर दुकानों पर आने तक अनेक संस्थानों में इसका कारोबार होता है। धागे, बुनाई, प्रोसेसिंग, रंगाई, धुलाई आदि से गुजरने के बाद दुकानों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचता है।

- राजीव सिंघल, ट्रस्टी 

भारत मर्चेंट चेंबर                               

उम्मीदों पर फिरा पानी 

पिछले साल हुए कारोबार का नुकसान उठाने के बाद उम्मीद थी कि कोरोना के मामले कम हो रहे हैं, थोड़ी राहत मिलेगी लेकिन इस बंदी से उम्मीदों पर पानी फिर गया है. माना कि कोरोना बढ़ रहा है, लेकिन इसके और विकल्पों पर विचार किया जा सकता था. दुकानों को बंद करने से बाजार को उबरने में फिर संघर्ष करना पड़ेगा।

- श्रीप्रकाश केडिया, कपड़ा कारोबारी


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