लॉकडाउन का डर, यूपी-बिहार वाले चले घर

 रेलवे स्टेशनों और  बस अड्डों पर बढ़ने लगी भीड़

crowd

मुंबई

पिछले एक महीने से मुंबई सहित पूरे राज्य में बढ़ते कोरोना संक्रमितों की संख्या को देखते हुए लॉकडाउन लगाए जाने की चर्चा गर्म है। लॉकडाउन की संभावना से डरे यूपी, बिहार के प्रवासी लोगों ने अपने घर की तरफ पलायन शुरू कर दिया है। पिछले साल के अनुभव को देखते हुए कोई भी प्रवासी रुकने का खतरा मोल नहीं लेना चाहता। शुक्रवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने संक्रमितों की संख्या कम न होने पर लॉकडाउन की चेतावनी दी है। इससे झोपड़पट्टी के गली मोहल्लों में लॉकडाउन लगने की चर्चा शुरू हो गई है, जिससे डर कर उत्तर भारतीयों ने दोबारा पलायन शुरू कर दिया है।

 इन दिनों उत्तर भारत में गेहूं की कटाई मड़ाई के साथ शादी विवाह का भी मौसम है। साथ ही यूपी में हो रहे पंचायत चुनावों ने भी लोगों को गांव आने के लिए प्रेरित किया है। इसके चलते बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर हलचल तेज हो गई है। इसमें बिहार और उत्तर प्रदेश की तरफ जाने वालों की अधिक संख्या है। कुर्ला के लोकमान्य तिलक टर्मिनस, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल और बांद्रा से जाने यूपी-बिहार जाने के लिए स्टेशनों पर भारी भीड़ दिखाई देने लगी है। पिछले कई दिनों में मुंबई और राज्य के कई अन्य जिले में बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए मुंबई में रात का कर्फ्यू लगा दिया गया है। जिसके कारण होटल, दुकानों और विभिन्न संस्थानों की व्यवसाय पर भारी असर पड़ने लगा है। इन संस्थानों में काम करने वाले हजारों असंगठित मजदूरों के अलावा ऑटो-और टैक्सी चालक भी रेलवे काउंटरों पर घर जाने के लिए टिकट की लाइनों में लगे हुए है। एक तरफ जहां राज्य सरकार कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का सख्त निर्देश दिया है वहीं बड़ी संख्या में मुंबई से गांव जाने वाले प्रवासी लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार शनिवार को कुर्ला के  लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर यूपी और बिहार के लोगों की भारी भीड़ देखी गई जो अपने परिवार और सामान के साथ गाड़ी पकड़ने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहे थे। साल 2011 की जनगणना के अनुसार मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और ठाणे जिला में एक करोड़ से अधिक उत्तर भारतीय रहते हैं, जिसमें सर्वाधिक रिक्शा, टैक्सी चालक, सिक्युरिटी और मजदूरी कर अपनी जीविका चलाने वाले हैं।

पिछले साल कोरोना महामारी के बाद महाराष्ट्र सहित पूरे देश में लगाए गए लॉकडाउन में सबसे अधिक तकलीफ यूपी और बिहार से महाराष्ट्र में रहने वाले सामान्य नागरिकों को उठानी पड़ी थी, जिन्हें लॉकडाउन के बाद कई दिनों तक राशन तक नहीं मिला था। 

यातायात बंद होने से बड़ी संख्या में लोग पैदल ही निकल पड़े थे। बड़ी संख्या में रिक्शा, टैक्सी, दुपहिया वाहन से लोग गांव रवाना हो गए थे। साल 2020 जैसी स्थिति बनने से पहले ही उत्तर भारतीयों ने अपने गांव जाना मुनासिब समझा है।

पलायन का कारण ग्राम पंचायत चुनाव भी  

पिछले तीन-चार दिनों से शुरू उत्तर भारतीयों का पलायन जारी है। जानकारों के अनुसार अप्रैल से मई महीने के बीच उत्तर भारतीयों का गांव जाने का रिवाज है। लेकिन इस बार प्रदेश में जिला और ग्राम पंचायत का चुनाव शुरू है, जिसमें मतदान करने के लिए बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय पलायन कर रहे है। जिला और ग्राम पंचायत के मतदान करने के लिए उम्मीदवारों द्वारा विशेष रूप से बुलाया गया है।


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