रमजान में रखें खानपान का ध्यान

iftar

भीषण गर्मी और कोरोना के कारण लॉकडाउन से होने वाली परेशानियों ने रमजान के रोजा रखने वालों की अनुभवों को कई गुना बढ़ा दिया है. मधुमेह (डायबटीज़) के रोगियों को दोपहर के बाद आराम करना चाहिए ताकि उन्हें रोज़ा रखने में कोई परेशानी न हो. आम तौर पर डायबटीज़ के रोगी रोज़ा नहीं  रखते हैं. ऐसा नहीं है की उनके लिए हानिकारक या घातक साबित हो सकता है. खाने पीने में सावधानी और सेहरी से पहले और इफ्तार के बाद में खाने-पीने में सावधानी बरतने के साथ-साथ उचित दवाई लेकर भी वे रोज़ा रख सकते हैं. 

डॉ अलतमश शेख बताते हैं ऐसे रोगियों को मेरी सलाह है कि जिनका मामला बहुत हाई रिस्क (हार्ट , किडनी , लकवा) के स्टेज तक पहुंच चूका है वे प्रतिष्ठित डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही रोज़ा रखने या न रखने का निर्णय लें. रमजान सभी मौसमों में आता है. इस बार अत्यधिक गर्मी में रोज़ा आ गए हैं. मौसम के प्रभाव से बचने के लिए उचित व्यवस्था कर लेना  चाहिए. रोज़े का उद्देश्य ही यही है की हम मानसिक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से सभी प्रकार की स्थितियों और परीक्षणों का सामना करने के लिए  तैयार रहें.

जो बातें मेरे ज्ञान में हैं, वह मैं यहां सबके साथ साझा करना चाहूंगा. ऐसे रोगी रोज़ा रख सकते हैं. रोज़े में आम तौर पर चार प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं. जिनमें शुगर कम हो जाना  (७० से कम हो जाना), हाई शुगर (३०० से अधिक) डिहाइड्रेशन , पानी का लेवल कम हो जाना, क्रामबोसिस हैं. रोज़े रखने के फायदे अत्याधमिक और शारीरिक दोनों हैं. ग्यारह महीने जो हम खाते हैं इसे हमें रमज़ान में महीने में आराम देना है. 

सेहरी को जितनी देर से हो सके उसे आखरी समय तक करें. सेहरी में आप चावल, ब्रेड, रोटी के साथ आप अंडा, दही, चिकन, दूध जैसी प्रोटीन्स ले सकते हैं. सेहरी में बहुत ज्यादा चाय या काफी लेने से परहेज़ करना चाहिए. इफ्तार में २ खजूर , तीन गिलास पानी (सब्ज़ा पानी, पतली छाछ, पतली लस्सी, दूध या इंफ्यूज्ड वॉटर कोई भी अन्य स्नैक्स जैसे की ड्राई, बैगड़, ग्रिल्ड लें और तली हुई चीज़ों का इस्तेमाल कम करें. अगर आप रात में खाना खाते हैं, तो हल्का खाना खा सकते हैं. रात के खाने और सेहरी के बीच कम से कम छह घंटे का अंतर होना चाहिए ताकि आप सेहरी अच्छी तरह से कर सकें. डाइबिटीज़ के रोगी इफ्तार के एक घंटे बाद व्यायाम कर सकते हैं. हमारी इसके रोगियों को विशेष सलाह है कि जब शुगर का स्तर कम है या अधिक है, तब उन्हें तुरंत डायबिटीज के विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लें और अपनी दवा का एडजस्टमेंट रोज़ा रखने से पहले कर लें ताकि आपको रोज़ा रखने में कोई परेशानी न हो.


Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget