धर्मांतरण पर आदेश से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

वयस्क चुन सकते हैं अपना धर्म

religions

नई दिल्ली

देश में कोई भी वयस्क अपने मन मुताबिक धर्म को अपना सकता है और उसे ऐसा करने की पूरी आजादी है। धर्मांतरण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही है। अधिवक्ता और ‍भ्‍ााजपा  लीडर अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी में शीर्ष अदालत से काला जादू, अंधविश्वास और धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर बैन लगाने की मांग की थी। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया और उपाध्यय को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने कहा कि 18 साल से अधिक आयु के व्यक्ति को धर्म चुनने से रोकने की हम कोई वजह नहीं मानते। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि यह पीआईएल पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन जैसी हो गई है, जिसका मकसद लोकप्रियता हासिल करना है। शीर्ष अदालत ने संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 में प्रचार की बात कही गई है, जो धर्म की आजादी देता है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई से इंकार के बाद उपाध्याय ने अपनी अर्जी को वापस ले लिया। उपाध्याय का कहना है कि वह इस संबंध में कानून मंत्रालय और विधि आयोग के समक्ष अपनी बात रखेंगे। अधिवक्ता ने अपनी अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को काला जादू, अंधविश्वास और धोखाधड़ी से धर्मांतरण को रोकने के लिए आदेश जारी करे। 

याचिका में मांग की गई थी कि धर्मांतरण विरोधी कानूनों के पालन के लिए एक कमिटी के गठन का आदेश दिया जाना चाहिए, जिसका काम धोखाधड़ी से धर्मांतरण के मामलों की निगरानी करना होगा।


Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget