क्या लंबे समय तक कारगर है कोवैक्सीन


नई दिल्‍ली

देश में बढ़ते कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने और इससे निपटने के लिए शोधकर्ता लगातार कोशिश कर रहे हैं. दो स्‍वदेशी कोरोना वैक्‍सीन का टीकाकरण भी चल रहा है. लोगों को इनकी दो डोज दी जा रही हैं. 1 मई से टीकाकरण अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत से पहले एक अहम शोध किया गया है. इसके तहत चेन्‍नई में 7 लोगों को सोमवार को कोरोना वैक्‍सीन कोवैक्सिन की तीसरी डोज दी गई है. इसे बूस्‍टर डोज कहा जा रहा है. ऐसा यह देखने के लिए किया गया कि क्‍या इससे व्‍यक्ति के शरीर में लंबे समय के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार चेन्‍नई के एसआरएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में 7 लोगों को कोवैक्सिन की तीसरी डोज दी गई है. उन्‍हें 6 महीने पहले वैक्‍सीन की दूसरी डोज दी गई थी. इस शोध के तहत नई दिल्‍ली, पटना और हैदराबाद जैसे शहरों के 8 केंद्रों में कुल 190 लोगों को वैक्‍सीन की तीसरी डोज दी जानी है. इनमें से करीब 20 से 25 लोग एसआरएम में ही यह डोज लेंगे. कोवैक्सिन को हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर बनाया है. अस्‍पताल में इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. सत्‍यजीत मोहापात्रा के अनुसार शोध में शामिल सभी लोग 18 से 55 साल के बीच के हैं। इन पर अगले 6 महीने तक निगरानी रखी जाएगी. इन सभी लोगों के एक महीने, तीन महीने और 6 महीने के बाद ब्‍लड सैंपल लिए जाएंगे।


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