अपनों ने की नादानी तो हाथ से फिसल गई थी प्रधानी

जौनपुर

पंचायत चुनाव में जीत के लिए प्रत्याशी क्या कुछ नहीं करते। प्रचार-प्रसार से लेकर मतदाताओं की सेवा सत्कार तक में पूरा जोर लगाते हैं। अगर थोड़ा जोर वह मतदाताओं को वोट देने का सही तरीका समझाने में भी लगा दें चुनावी परिणाम की तस्वीर भी बदल सकती है। वर्ष 2015 के चुनाव में ऐसे कई गांव रहे, जहां मतदाताओं के अंगूठे ने उनके प्रत्याशी की लुटिया डूबो दी। इन गांवों में महज एक-दो वोटों से हार जीत हुई। रोचक बात यह रही कि जितने वोटों से जीत हुई थी, उससे कई गुना वोट हारे हुए प्रत्याशी के अवैध मान लिए गए थे।

पंचायत चुनाव में इस बार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए एक साथ वोट पड़ने हैं। सभी प्रत्याशियों को वही चुनाव चिह्न आवंटित होने हैं, जो आयोग ने निर्धारित किए हैं। ग्राम पंचायत सदस्य के लिए सफेद मत पत्र, प्रधान पद के लिए हरा, बीडीसी सदस्य के लिए नीला और जिला पंचायत सदस्य के लिए गुलाबी मतपत्र इस्तेमाल किए जाएंगे। 

मतदाताओं को वोट देने के लिए अपने मनपसंद प्रत्याशी के चुनाव निशान के सामने मुहर लगानी होगी। फिर इसे सही तरीके से मोड़कर मतपेटी में डालना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम मतदाता वोट देते समय यहीं चूक कर जाते हैं। कोई मुहर की जगह अंगूठा में लगी स्याही लगा देता है तो कोई मतपत्र सही ढंग से न मोड़ पाने की गलती कर बैठता है। स्याही एक से अधिक निशान पर पुत जाने से उनके वोट अवैध मान लिए जाते हैं। नतीजा वह अपने प्रत्याशी को वोट देकर भी उसकी जीत में सहभागी नहीं बन पाता। उन प्रत्याशियों को यह खामी भारी पड़ जाती है, जहां मुकाबला बेहद नजदीकी होता है। पिछले चुनाव में मतदाताओं की इस चूक का कई उम्मीदवारों को खामियाजा भुगतना पड़ा है। अमूमन हर चुनाव में ही ऐसी नौबत आती है, बावजूद प्रत्याशी वोट लेने में जितना जोर लगाते हैं, मतदाताओं को सही तरीका बताने में रुचि नहीं लेते। 


Labels:

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget