जजों की रिटायरमेंट उम्र समान करने वाली अर्जी पर SC का दखल से इंकार

 


नई दिल्ली

देश के सभी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की रिटायरमेंट की एक समान उम्र तय करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इंकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली। यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया था कि अगर सेवानिवृत्ति के लिए तय उम्र में एकरूपता रहेगी तो हाईकोर्ट के जज आजादी से न्यायिक कार्य कर पाएंगे और हाईकोर्ट जाने की कोई अपेक्षा भी नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के बीच अधीनस्थता की आशंका भी कम होगी, इसलिए हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की तरह होनी चाहिए।

बता दें कि मौजूदा समय में हाईकोर्ट के जज 62 साल की आयु पूरी होने के बाद रिटायर हो जाते हैं, लेकिन 114वां संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के बाद हाईकोर्ट के जजों के रिटायरमेंट की आयु सीमा भी बढ़कर 65 साल हो जाएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की आयु में रिटायर होते हैं। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने यह याचिका 5 अप्रैल को दायर किया था। अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में कोर्ट से अपील की थी कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों में ही कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र एक जैसी होनी चाहिए। फिलहाल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिटायर होने की आयु सीमा अलग-अलग है। दोनों ही कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र में तीन साल का अंतर है। हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल है।

 वहीं, सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं.


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