एक अरब 41 करोड़ हुई चीन की जनसंख्या


बीजिंग

चीन की आबादी बढ़त के साथ एक अरब 41 करोड़ हो गई है। विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के रूप में इसका स्थान कायम है। हालांकि अगले साल से चीन की आबादी में गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है। नतीजतन देश में कामगारों की कमी और खपत में गिरावट आ सकती है। चीन सरकार द्वारा मंगलवार को जारी सातवीं राष्ट्रीय जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार सभी 31 राज्यों, स्वायत्त क्षेत्रों और नगरपालिकाओं को मिलाकर देश की आबादी 1.41178 अरब हो गई है। इसमें हांगकांग और मकाऊ की जनसंख्या शामिल नहीं है। नेशनल ब्यूरो आफ स्टैटिस्टिक्स (एनबीएस) द्वारा जारी आंकड़े में कहा गया है कि चीन में जनसंख्या संकट गहरा होने की आशंका है, क्योंकि 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी में 18.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एनबीएस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि बड़ी संख्या में लोगों की उम्र बढ़ने के चलते आने वाले समय में दीर्घावधि संतुलित विकास पर दबाव बढ़ेगा।चीन की आबादी में 15 से 59 वर्ष के लोगों की संख्या 89.40 करोड़ है। 2010 की जनगणना के मुकाबले इसमें 6.79 प्रतिशत की कमी आई है। सातवीं जनगणना के मुताबिक चीन में आबादी की बढ़ोतरी की दर 0.57 प्रतिशत सालाना है। 2010 की छठी जनगणना में यह 0.57 प्रतिशत और 2000 की पांचवीं जनगणना में 1.07 प्रतिशत थी। देश की जनसंख्या में सबसे ज्यादा 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी 1982 की जनगणना में दर्ज की गई थी। उसके बाद से आबादी की बढ़ोतरी में लगातार गिरावट का रुख देखा जा रहा है।

 1950 के बाद से चीन की आबादी में यह सबसे कम बढ़ोतरी है। इसके चलते अर्थव्यवस्था को गति देने के इसके प्रयासों को उसी तरह का झटका लग सकता है, जैसी परिस्थिति का जापान जैसे विकसित देश को सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि चीन में प्रति महिला प्रजनन दर 1.3 है। यह बढ़ती उम्र वाले देशों जापान और इटली के बराबर है। एक बच्चा नीति में कुछ छूट देते हुए चीन ने 2016 में 2020 तक देश की आबादी को 1.42 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था।

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