बैंक डूबने पर डूब जाएगी 4.8 करोड़ खातों की रकम


नई दिल्ली

जब कोई बैंक दिवालिया हो जाता है, तो जमाकर्ता के पास एकमात्र राहत डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी डीआईसीजीसी द्वारा दिया जाने वाला इंश्योरेंस कवर होता है। 4 फरवरी, 2020 से डीआईसीजीसी के तहत इंश्योरेंस कवर एक लाख रुपए से पांच लाख रुपए तक बढ़ाया गया है।

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 4.8 करोड़ खातों में जमा रकम अब भी सुरक्षित नहीं है। दरअसल, आरबीआई की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2021 तक 252.6 करोड़ खातों में से 247.8 करोड़ का ही इंश्योरेंस है। यानी 4.8 करोड़ खातों की रकम डीआईसीजीसी के तहत बीमित नहीं है यानी इन खातों में जमा रकम बैंक के डूबने से डूब सकती है।

बैंकों में जमा की गई राशि का लगभग 49.1% का नहीं है बीमा

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2021 के अंत तक कुल बीमित जमा राशि 76,21,258 करोड़ रुपए थी। यह  1,49,67,776 रुपए के आकलन योग्य जमा का केवल 50.9 फीसदी है। इसका मतलब यह है कि बैंकों में जमा की गई राशि का लगभग 49.1 फीसदी डीआईसीजीसी कवर में नहीं है।

क्यों नहीं सुरक्षित है 4.8 करोड़ खातों की रकम

डीआईसीजीसी कवर सभी बैंकों के लिए उपलब्ध है, उन्हें इस सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन करना होता है और इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान करना होगा। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का डीआईसीजीसी के साथ पंजीकृत नहीं होना या प्रीमियम का भुगतान नहीं करना जमा को कवर नहीं करने का मुख्य कारण है।

डिपॉजिट इंश्योरेंस कैसे करता है काम?

डीआईसीजीसी के गाइडलाइंस के मुताबिक बैंक के लाइसेंस रद्द की तारीख या मर्जर या पुनर्निर्माण के दिन बैंक में प्रत्येक जमाकर्ता को उसके पास मूलधन और ब्याज की राशि के लिए अधिकतम 5 लाख रुपए तक का बीमा किया जाता है। इसका मतलब यह है कि एक ही बैंक में आपके सभी अकाउंट्स को मिलाकर कितना ही पैसा जमा क्यों न हो, आपको केवल 5 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर मिलेगा। इस राशि में मूलधन और ब्याज की राशि दोनों शामिल हैं। बैंक के विफल होने पर अगर आपकी मूल राशि 5 लाख रुपये है, तो आपको केवल यह राशि वापस मिलेगी और ब्याज नहीं.

इन अकाउंट्स पर मिलते हैं डीआईसीजीसी इंश्योरेंस कवर

डीआईसीजीसी द्वारा दिया जाने वाला बीमा कवर सेविंग अकाउंट्स, एफडी, करंट अकाउंट्स, आरडी आजि जैसे डिपॉजिट पर काम करता है. डीआईसीजीसी की डिपॉजिट इंश्योरेंस एलएबी, पीबी, एसएफबी, आरआरबी और सहकारी बैंकों सहित सभी बीमाकृत कामर्शियल बैंकों को कवर करता है.  31 मार्च, 2021 तक डीआईसीजीसी के साथ पंजीकृत बीमित बैंकों की संख्या 2,058 थी. इसमें 139 कमर्शियल बैंक शामिल हैं, जिनमें से 43 आरआरबी, 2 स्थानीय क्षेत्र बैंक, 6 पेमेंट्स बैंक हैं और 10 स्मॉल फाइनेंस बैंक. इसके अलावा 1,919 कोऑपरेटिव बैंक भी पंजीकृत हैं, जिनमें 34 राज्य कोऑपरेटिव बैंक (एसटीसीबी), 347 जिला केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंक (डीसीसीबी) और 1,538 अर्बन कोऑपरेटिव बैंक हैं.


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