कक्षा 6, 7, 8, 9 और 11 के छात्रों को प्रोन्नत करने का फैसला

लखनऊ

यूपी सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल (10वीं) की बोर्ड परीक्षा निरस्त करने का फैसला किया है। यूपी बोर्ड के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा। इस परीक्षा के लिए 29,94,312 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इन अभ्यर्थियों को लंबे समय से सरकार के फैसले का इंतजार था। सरकार ने परिस्थितियां अनकूल होने पर इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा जुलाई के दूसरे हफ्ते में कराने का फैसला किया है। यह परीक्षा मात्र डेढ़ घंटे की होगी, जिसमें परीक्षार्थी को केवल तीन प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के 56 लाख छात्रों के व्यापक हित में यह फैसला लिया गया। बोर्ड को कक्षा 10 के छात्रों की कक्षा 11 में प्रोन्नति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश बनाने के आदेश दिए गए हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि कक्षा 12 की परीक्षा के महत्व को देखते हुए यह परीक्षा निरस्त न करने का फैसला लिया गया। हालात सुधरने पर कोविड-19 से बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए वर्ष 2021 की इंटरमीडिएट की परीक्षा को जुलाई के दूसरे हफ्ते में कराए जाने का प्रस्ताव है। 

इसकी विस्तृत समय सारणी शीघ्र हीसाझा की जाएगा। इस वर्ष भी 15 कार्य दिवसों में यह परीक्षा कराई जाएगी। प्रश्नपत्र की अवधि को मात्र डेढ़ घंटे रखा जाएगा तथा छात्रों को 10 प्रश्नों में किन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर देने की स्वतंत्रता होगी। कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा के लिए इस वर्ष 26,10,316 छात्रों का पंजीकरण हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में कक्षा 6, 7 व 8 के छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नति देने के फैसला का शासनादेश पूर्व में ही जारी कर दिया गया है।  


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