प्राइवेट सेंटर्स सीधे कंपनियों से खरीदें वैक्सीन : सरकार

केंद्र से मिलने वाली वैक्सीन सिर्फ सरकारी अस्पतालों के लिए

vaccine

मुंबई

केंद्र सरकार के निर्देश के मुताबिक कल (शनिवार, 1 मई) से 18 साल से अधिक उम्र के लोग वैक्सीन ले सकेंगे, लेकिन महाराष्ट्र में वैक्सीन की भारी कमी को देखते हुए वैक्सीनेशन की इस मुहिम पर ब्रेक लगता हुआ दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार जल्दी ही 18 से 44 साल की उम्र के नागरिकों के लिए वैक्सीनेशन मुहिम शुरू करने की बात कह चुकी है,लेकिन वैक्सीन की कमी इस हद तक है कि 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन ही पूरी नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को मुंबई और पुणे सहित राज्य के कई इलाकों में अगले तीन दिनों तक वैक्सीनेशन बंद होने की सूचना वाला बोर्ड लटकाना पड़ गया। ऐसे हालात में राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब से केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाली वैक्सीन केवल सरकारी अस्पतालों और वैक्सीन केंद्रों में ही इस्तेमाल में लाई जा सकेंगी। केंद्र द्वारा भेजी जाने वाली वैक्सीन के स्टॉक का इस्तेमाल अब प्राइवेट अस्पताल और वैक्सीनेशन केंद्र नहीं कर सकेंगे।

प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन सप्लाई बंद

राज्य में वैक्सीन की कमी के संकट को देखते हुए ठाकरे सरकार ने यह निर्णय लिया है। अब से प्राइवेट अस्पताल और वैक्सीन सेंटरों को अपनी जरूरत के हिसाब से वैक्सीन सीधे वैक्सीन निर्माता कंपनियों से मंगवाना पड़ेगा। राज्य सरकार उन्हें वैक्सीन सप्लाई करने की जिम्मेदारी नहीं निभाएगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में सूचना जारी कर दी है और यह सूचना प्राइवेट अस्पतालों को मिल भी चुकी है। 1 मई, शनिवार से इस निर्णय पर अमल शुरू हो जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा प्राइवेट अस्पतालों और वैक्सीन सेंटरों में बची हुई अतिरिक्त वैक्सीन के स्टॉक को वापस मंगवाए जाने की भी संभावना है।

क्या है पूरी खबर?

केंद्र सरकार ने  शनिवार, एक मई से 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन का निर्णय लिया है,लेकिन महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में वैक्सीन के स्टॉक की अत्यधिक कमी है। इसलिए महाराष्ट्र में एक मई से 18 से 44 साल के लोगों के लिए वैक्सीनेशन की मुहिम शुरू नहीं हो पाएगी। इसकी घोषणा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे पहले ही कर चुके हैं। राज्य सरकार के पास वैक्सीन के पूरे स्टॉक उपलब्ध हों, इसके लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन फिलहाल तो राज्य वैक्सीन की कमी के संकट से जूझ रहा है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि अब से केंद्र सरकार द्वारा भेजी जाने वाली वैक्सीन का स्टॉक सिर्फ सरकारी अस्पताल और वैक्सीन केंद्र ही इस्तेमाल में ला पाएंगे। प्राइवेट अस्पतालों और वैक्सीन केंद्रों को वैक्सीन सीधे वैक्सीन निर्माता कंपनियों से मंगवानी पड़ेगी।

अब तक क्या होता था?

अब तक केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माता कंपनियों से 100 प्रतिशत स्टॉक खरीदा करती थी और फिर उन्हें अलग-अलग राज्य सरकारों को भिजवा दिया करती थी। अब से केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माता कंपनियों से सिर्फ 50 प्रतिशत स्टॉक खरीद रही है। बाकी बचे 50 प्रतिशत स्टॉक को वैक्सीन निर्माता कंपनियां राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों को बेच सकती हैं।


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