खाद पर सब्‍सिडी बढ़ी, माने मोदीजी का आभार : पाटिल


मुंबई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने 14,775 करोड़ रुपए के अनुदान का अतिरिक्त बोझ उठाकर किसानों को पिछले साल की दरों पर डीएपी रासायनिक खाद उपलब्ध कराया है। ऐसे में मूल्यवृद्धि की शिकायत करने वाले कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं को प्रधानमंत्री का ईमानदारी से आभार प्रकट करना चाहिए। यह बात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कही।

उर्वरक सब्सिडी में 140 प्रतिशत की वृद्धि

चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया जैसे रसायनों के दाम बढ़ने से उर्वरक कंपनियों ने डीएपी उर्वरक के दाम बढ़ा दिए। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उर्वरक सब्सिडी में 140 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया। नतीजतन किसानों को खाद की बोरी पिछले साल के दाम पर मिलेंगी। हालांकि इससे केंद्र सरकार पर बोझ बढ़ेगा, लेकिन किसानों के लिए मूल्य वृद्धि रद्द कर दी गई है। कंपनियों द्वारा दाम बढ़ाने के बाद मोदी सरकार लगातार किसानों को राहत देने की कोशिश कर रही थी। इसे ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की प्रक्रिया चल रही थी। केंद्र सरकार ने 15 मई को एक प्रेस विज्ञप्ति में घोषणा की थी कि वह किसानों को सब्सिडी बढ़ाने पर विचार कर रही है। पांच दिनों में फैसला हो गया। सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया को पर्याप्त समय न देते हुए राकांपा ने इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया, जबकि कांग्रेस ने आंदोलन का संकेत दिया। इन दलों को मोदी सरकार को तत्काल कार्रवाई करने और किसानों को राहत प्रदान करने के लिए धन्यवाद देना चाहिए।

कांग्रेस- पवार की वजह से बढ़े भाव

पाटिल ने कहा कि डीएपी उर्वरकों में मूल्य वृद्धि की समस्या के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार जिम्मेदार हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने फॉस्फेटिक और पौटेशिक खाद के लिए 1 अप्रैल 2010 को पोषक तत्व आधारित सब्सिडी पॉलिसी लागू की। इस अनुसार केंद्र सरकारने डीएपी जैसे उर्वरकों के लिए सब्सिडी सीमित करने और कंपनियों को उर्वरकों की कीमत तय करने की अनुमति लागू की गई।  नतीजतन कंपनियों के कीमतें बढ़ाने का रास्ता खुल गया। रसायन और उर्वरक पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी 2019-20 की रिपोर्ट में उर्वरक कंपनियों की मुनाफाखोरी पर चिंता व्यक्त की थी। विशेष बात यह है कि जब शरद पवार केंद्रीय कृषि मंत्री थे और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान हुए इस बदलाव को भूलकर दोनों पार्टी के नेता मोदी सरकार पर टिप्पणी कर रहे थे।


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