चुनाव आयोग बनाएगा कोर कमेटी

कमियों को पहचानकर करेगा सुधार


नई दिल्ली

हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अलग-अलग आरोपों का सामना कर रहा चुनाव आयोग अब आत्मनिरीक्षण के दौर से गुजर रहा है. चुनाव खत्म होने के बाद आयोग ने बीते चुनावों से मिले अच्छे-बुरे अनुभवों से सबक लेने का मन बनाया है. आयोग ने चुनाव सुधार, आदर्श चुनाव आचार संहिता, चुनाव सामग्री, चुनाव मैनेजमेंट, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी आदि विषयों पर सुझाव देने को लेकर एक कोर कमेटी बनाने का फैसला लिया है, जिसके बाद आयोग फिर से चुनाव सुधार के कामों और चुनाव से जुड़े कानूनों को धार देने का काम करेगा.

जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग ने असम, बिहार, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, और पुडुचेरी के हालिया चुनावों से सीखने, अनुभवों और कमियों की पहचान करने के लिए महासचिव की अध्यक्षता में एक कोर समिति गठित करने का निर्णय लिया है. आयोग के एक बयान में कहा गया है कि समिति को राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में अनुभवों, उनका एनालिसिस करने और आगे के तरीकों और सुधारों पर सुझाव देने के लिए कहा गया है. चुनाव आयोग के उपचुनाव आयुक्त और हालिया मतदान वाले राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारी और कुछ चुनिंदा विशेष पर्यवेक्षक इस समिति के सदस्य होंगे.

समिति को सौंपे जा सकते हैं ये काम 

राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में जल्द से जल्द चुनाव सुधार को लेकर सुझाव देना, कोरोना नियमों और दिशानिर्देशों के पालन में चुनाव आयोग को सक्षम बनाने के लिए कानूनी या नियामक ढांचे को मजबूत करने के उपाय, चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों के अलावा और इसके लिए संबंधित नियम या कानून के तहत अनिवार्य एजेंसियों या अधिकारियों की ओर से कोविड प्रोटोकॉल के पालन कराने जैसी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करने के उपाय, अगर चुनावी मशीनरी को सुरक्षा देने में मौजूदा ढांचे में कमी हो तो इस कमी को दूर करने के उपाय, वोटर लिस्ट और ईपीआईसी के वितरण और कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी से संबंधित मुद्दों में कमी हो तो उसे दूर करने के उपाय बताना शामिल है.

कोर कमेटी एक महीने के भीतर देगी रिपोर्ट

अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देते समय ये कमेटी अलग-अलग राज्यों के नोडल अधिकारियों से जैसे पुलिस, स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ कुछ डीईओ, एसपी, आरओ से भी जानकारी लेगी. इसी के साथ, कमेटी उन नौ कार्यकारी समूहों की सिफारिशों की भी जांच करेगी, जिनकी स्थापना लोकसभा चुनाव 2019 के बाद की गई थी. कोर कमेटी की सिफारिशें आयोग को भविष्य में आने वाले चुनावों के लिए ठीक से तयारी करने में मदद करेंगी. कोर कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है.

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