संस्कृत साहित्य के विद्वान पं. रेवा प्रसाद द्विवेदी का निधन

वाराणसी

काशी पांडित्य परंपरा के दैदीप्यमान नक्षत्र महामहोपाध्याय रेवा प्रसाद द्विवेदी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। साहित्य के प्रकांड विद्वान पं. द्विवेदी ने शुक्रवार को मध्यरात्रि में अंतिम सांस ली। शनिवार की सुबह हरिश्चंद्र घाट उनके पांच भौतिक शरीर का दाह-संस्कार किया गया। उनके छोटे पुत्र प्रो. सदाशिव द्विवेदी ने मुखाग्नि दी।  उनके निधन से संस्कृत जगत में शोक की लहर है। पं. रेवा प्रसाद द्विवेदी साहित्य शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान थे। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रमुख, साहित्य विभाग में विभागाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर अपने सेवाएं दीं। उन्होंने कई ग्रंथों की भी रचना की, जिसमें तीन महाकाव्य एवं 20 खंडकाव्य शामिल हैं। शताब्दी का सबसे बड़ा महाकाव्य ‘स्वातंत्र्यसंभव’ उनमें से एक हैं, जो 103 सर्ग में लिखा था। साहित्य शास्त्र के छह मौलिक ग्रंथों की रचना भी उन्होंने की थी। काशी विद्वत्परिषद के संगठन मंत्री के रूप में उनकी सेवाएं अविस्मरणीय हैं। प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। हरिश्चंद्र घाट पर उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए काशी के विद्वानों की उपस्थिति रही, जिसमें प्रो. भगवत शरण शुक्ल, प्रो. विजय शंकर शुक्ल, प्रो. रामनारायण द्विवेदी आदि शामिल रहे।


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