संगीत और सेहत की संगत


संगीत की ताक़त कितनी है और कहां तक है, अगर संगीत में थोड़ी-बहुत दिलचस्पी है, तो आपको ज़रूर पता होगा. इतिहास की मानें तो तानसेन जब राग मेघ मल्हार गाते थे, तो बारिश होती थी और राग दीपक से दीप जल जाते थे. संगीत की सकारात्मकता हमारी सेहत को भी फ़ायदा पहुंचाती है, और शायद इसीलिए हवा, पानी, नदी, समुद्र, पक्षी और हम इंसानों के भीतर क़ुदरतन संगीत भरी हुई है. 

तय है संगीत सुनने का समय

वैदिक संगीत पाठों में यह निर्देश दिया गया है कि सुबह, दोपहर और शाम के लिए कौन-सा राग उपयुक्त है. दोपहर के बाद वात अपने शिखर पर पहुंच जाता है, तब अधिक शांत संगीत सुनना चाहिए, यह शरीर की थकावट को दूर कर सकता है और मस्तिष्क के तनाव को कम करता है. यदि उचित रूप से इन्हें सुना जाए तो कई रोगों से बचा जा सकता है.

दस मिनट का संगीत और पाएं सेहतमंद शरीर

यदि आप अपने रक्तचाप को कम करना चाहते हैं, तो हल्के, मंद शास्त्रीय संगीत को सुनना अच्छा होता. कई तरह के शारीरिक दोषों को स्वरों से संतुलित और असंतुलित किया जाता है. यदि आप सोने की कोशिश करते हैं, पर आपका मस्तिष्क अभी भी चिंतन कर रहा है और नींद नहीं आ रही है, तो आप संगीत सुनकर इस परेशानी को दूर कर सकते हैं. संगीत को अपनी दिनचर्या में शामिल करके कुछ हद तक आम परेशानियों को दूर किया जा सकता है. 

संगीत सुनने का सही तरीक़ा?

संगीत सुनने के लिए अपनी आंखें बंद करके शांत बैठ जाएं और अपना ध्यान संगीत की तरफ़ लगाएं. अगर आपका मन भटके तो इसे आराम से संगीत पर ले आएं. वही संगीत सुनें, जो आपकी प्रकृति से मेल खाता हो. यह पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत, पारंपरिक भारतीय राग और वर्तमान समय का संगीत भी हो सकता है. यदि संगीत सुनने से आप ख़ुद को ख़ुश, हल्का और एनर्जेटिक महसूस कर रहे हैं, तो समझ जाएं कि संगीत अपना काम कर रहा है.


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