राहत की बात लेकिन लापरवाही की जगह नहीं

कोरोना के मामलों में कमी और पॉजिटिविटी दर में  सुधार दोनों सकारात्मक संकेत है कि देश में कोरोना की दूसरे लहर का प्रकोप कम हो रहा है परंतु मृत्यु दर का अभी भी नियंत्रित ना होना देशव्यापी चिंता का कारण है. ऐसे में हमें किसी भी कीमत पर अपनी  सतर्कता में कोई ढील नहीं देनी है. कारण यह हम सबकी ढील का ही नतीजा है जो आज पूरा देश  महामारी के कहर से त्राहि  त्राहि कर रहा है  अब इसका सतर्कता से, धैर्य से मुकाबला करना  ही एकमात्र ऐसा उपाय है जिससे इसे हराया जा सकता है जो देश कर रहा है. इस महामारी से लड़ने के लिए जो जरूरी उपकरण और साजो समान केंद्र द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है. राज्य सरकारें उसका समुचित उपयोग सुनिश्चित करें जिस तरह वेंटीलेटर और अन्य चीजों के धूल खाने और सील बंद पड़े होने की खबरें आ रही है यह घोर लापरवाही है. ऐसे कठिन समय में यह ऐसी लापरवाही एेसे अपराध की श्रेणी में आता है जिसकी कोई माफी नहीं है. लापरवाही और कालाबाजारियों की ह्रदयहीनता आज भी दो ऐसे दंश है जिनका इलाज हमने मिलकर ढूढ़ना है. कारण दोनों के कुकर्मों का खामियाजा उन निर्दोष मरीजों को भोगना पड रहा है जिन्हें लापरवाही के चलते समय  से दवाई या अन्य सुविधा नहीं मिल पाती और कालेबाजार में उन्हें उसकी कई गुना ज्यादा  कीमत चुकानी पड़ती है. मंगलवार को चुनिन्दा जिला अधिकारियों के साथ संवाद में प्रधानमंत्री ने इन्हीं सब  बातों की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है और उनसे एक ऐसे फील्ड कमांडर की तरह का नेतृत्व करने की अपेक्षा व्यक्त की जो इन गड़बड़ियों को दूर कर सके और जनता को जीवनावाश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए  जिले के हर अंचल में, हर नागरिक तक उन सभी सुविधाओं को पहुंचा सके जो कोरोना से लड़ने के लिए जरूरी है. कारण अब कोरोना गांवों  को अपना निशाना बना रहा है और शहरों की तुलना में किस तरह हमारी गांवों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी है, जो उपलब्ध है वह दूर है यह हम सब जानते है.

यह शुभ संकेत है कि देश के शहरी इलाकों में महामारी की रफ़्तार कमजोर हो रही है. अब राज्य सरकारों का, सरकारी मशीनरी का ध्यान गांव की ओर जा रहा है और परीक्षण, पहचान और उपचार के तीन सूत्रों का अनुपालान कर ग्रामीण अंचल से भी महामारी  को रुखसत करने का अभियान तेज हो गया है. अब जबकि महामारी की दूसरी  लहर भी नियंत्रित हो रही है, इससे बचने के और अपने बीच से हमेशा के लिए रुखसत करने के कार्यों को तीव्र गति से जारी रखते हुए हमें हमारी केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और आम जन को इस बात पर भी मंथन करना जरूरी है कि जब हम महामारी की पहली लहर में से दुनिया के कई प्रगत राष्ट्रों की तुलना में काफी अच्छी हालत में बाहर निकल गए थे तो फिर हमसे हर स्तर पर कौन सी ऐसी  चूकें हुई कि आज हमारी हालत पर हम ही नहीं दुनिया भी त्राहि त्राहि कर रही है. कारण यदि हम इन चूकों को नहीं समझेंगे और भविष्य में ऐसा ना करने का संकल्प नहीं लेंगे तो देश और दुनिया के  विशेषज्ञ जो हमारे देश में  तीसरी लहर आने की और उसके बच्चों को निशाना बनाने की भविष्यवाणी कर रहे है उसे बच नहीं सकेंगे. देश के कई हिस्सों से बच्चों के संक्रमित होने की ख़बरें भी आ रही है.

ऐसे में राहत देख कर आनंदातिरेक में गोते लागने की कोई जगह नहीं है और ना ही यह मानने का कोई  कोई कारण है की हम कोरोना प्रूफ है और हमें  इसे लेकर कोई  सावधानी बरतने की जरूरत नहीं है. ऐसी खुशफहमी पालने वाले लोगों के एक बड़े वर्ग को इस मानसिकता की बड़ी भारी कीमत चुकानी पड़ी है. जिसमे उन्होंने उनसे मिलने जुलने वालों और अपने परिजनों को भी लपेटा है. इसलिए हम हर तरह की लापरवाही. नादानी से बचें और जो भी हमारे आस पास कुछ ऐसा कर रहा हो उसे भी रोकें. सबका सही व्यवहार,अनुशासन और कोरोना से बचने के निर्देशों का सख्त अनुपालन और तेजी से टीकाकरण ही वह मार्ग है जो जल्द से जल्द हमें कोरोना से मुक्त करेगा. साथ ही ना अफवाह फैलाएं और न ही उसके शिकार बने तभी बात बनेगी.

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