जिंक की कीमतें होंगी कम


नई दिल्ली

अप्रैल’21 के बाद से अधिकांश बेस मेटल्स ने लंदन मेटल एक्सचेंज में डबल अंक की बढ़त दर्ज की है। एमसीएक्स और एलएमई पर जिंक की कीमतों में क्रमशः 9 प्रतिशत और 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। प्रमुख जिंक और तांबा उत्पादक देशों पेरू और चिली में खनन कंपनियों पर करों में वृद्धि के कारण जिंक की कीमतों में और मजबूती आई, जिससे उत्पादन सीमित हो सकता है। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में हालिया सुधार के बावजूद लंबी अवधि के लिए कम ब्याज दर के माहौल पर बढ़ते दांव ने अमेरिकी मुद्रा को सीमित रखा, जिसने डॉलर की कीमत वाली औद्योगिक धातुओं का समर्थन करना जारी रखा।

हालांकि एक महीने में जिंक की कीमतें एमसीएक्स पर 215 रुपए प्रति किलोग्राम तक कम होने की उम्मीद एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसोसिएट यश सावंत ने जताई है। उन्होंने कहा कि बढ़ती कमोडिटी कीमतों को स्थिर करने की दिशा में चीन का कदम औद्योगिक धातुओं के लिए काफी प्रतिकूल हो सकता है। जिंस की मांग और आपूर्ति के अपने प्रबंधन को मजबूत करने और कमोडिटी की कीमतों में अनुचित उछाल को प्रतिबंधित करने के चीन के इरादों से वैश्विक निवेशकों को आगे बढ़ने में सतर्कता रखनी पड़ सकती है।

इसके अलावा, चीनी अधिकारियों द्वारा लगाए गए कड़े बिजली खपत मानदंड न केवल आपूर्ति को बाधित कर सकते हैं बल्कि सबसे बड़े धातु खपत वाले देशों में मांग को भी प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त करने की उम्मीद से बेस मेटल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।


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