विद्युत शवदाह गृह बनाने के लिए उद्योगपतियों से सहायता लें : हाईकोर्ट

मुंबई

बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और औरंगाबाद नगर निकाय अधिकारियों से कहा कि वे जिले में विद्युत एवं एलपीजी शवदाह गृह बनाने के लिए उद्योग​पतियों तथा स्थानीय कॉरपोरेट समूहों से दान देने की अपील करें। विद्युत एवं एलपीजी शवदाह गृहों के निर्माण में आने वाली लागत के बारे में बताए जाने पर उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने इजराइल का उदाहरण दिया और कहा कि उसने अपने नागरिकों को टीका लगाने और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर कोविड रोधी टीके खरीदे।

अदालत ने कहा कि अधिकारियों को औरंगाबाद के औद्योगिक क्षेत्र से अपील करनी चाहिए कि वह शवदाह गृहों के निर्माण के लिए अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत दान करे। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति भालचंद्र देबद्वार की पीठ ने यह निर्देश तब दिया जब उसे बताया गया कि वर्तमान में औरंगाबाद जिले में एक भी विद्युत या एलपीजी शवदाह गृह नहीं है। अदालत स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो आवश्यक रूप से मास्क पहनने, महामारी से जान गंवाने वालों के उचित अंतिम संस्कार, चिकित्सकीय ऑक्सीजन की कमी और रेमडेसिविर दवा की कालाबाजारी जैसे मुद्दों से जुड़ी विभिन्न खबरों पर आधारित है। लोक अभियोजक डीआर काले ने पीठ को बताया कि विद्युत या एलपीजी शवदाह गृह का निर्माण करना और उसका रखरखाव काफी मंहगा है, क्योंकि उनके लिये नियमित विद्युत आपूर्ति चाहिए और इनमें हर समय एक निश्चित तापमान बनाये रखना जरूरी है। काले ने कहा कि इस समय अंतिम संस्कार के लिये लकड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है।  इस पर पीठ ने कहा कि मौजूदा स्थिति में मनमाने तरीके से बेतहाशा पेड़ काटे जायेंगे और इसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।  

पीठ ने कहा कि इजराइल से सबक लीजिये। उसने वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक रखने के लिये प्रति वैक्सीन 15 डालर की बजाए 30 डालर का भुगतान किया। उसने अपनी 90 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या का टीकाकरण कर दिया और इस तरह राष्ट्रव्यापी लाॅकडाउन लगाने से कई गुना बचत की।


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