साल भर से खड़ी है आइसोलेशन ट्रेन

प्रतापगढ़

कोरोना के इस दौर में चिकित्सा संसाधन कम पड़ रहे हैं। अस्पतालों में बेड की कमी से मरीज बेहाल हैं, वह मारे-मारे फिर रहे हैं। कई की जान इस भागदौड़ में चली जा रही है। महामारी के ऐसे नाजुक समय में भी अफसरों का ध्यान प्रतापगढ़ जंक्शन पर खड़ी आइसोलेशन ट्रेन पर नहीं जा रहा है। इसका उपयोग करके मरीजों को राहत दी जा सकती है। प्रशासनिक और रेलवे अधिकारियों की तरफ से इसे हरी झंडी दिखाने का इंतजार है। पिछले साल जब कोरोना की पहली लहर आई थी तो कई तरह के इंतजाम किए गए थे। केंद्र सरकार ने देश के तमाम जिलों में आइसोलेशन कोच वाली ट्रेन भेजी थी। इसमें कोरोना के मरीजों को भर्ती करके उपचार किया जा रहा था। उस वक्त प्रतापगढ़ को भी एक गाड़ी मिली थी। यह अब भी जंक्शन पर एक किनारे खड़ी धूल फांक रही है। यह जिले में कोरोना कहर में हॉस्पिटल में बेड और संसाधनों की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए हॉस्पिटल का विकल्प बन सकती है। ऐसे में जब बेड नहीं मिल रहा है तो 22 कोच की यह ट्रेन मरीजों को जगह दे सकती है। स्वास्थ्य विभाग भी इस बारे में अब तक नहीं सोचा है। ऐसे में आइसोलेशन ट्रेन खड़ी-खड़ी इस्तेमाल की बाट जोह रही है। इस ट्रेन के साथ ही प्रशासन को रेलवे क्लीनिक की भी सुविधा मिल सकती है। 

रेलवे अस्पताल में चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, दवा व सफाई कर्मी हैं। बिजली, पानी और भरपूर जगह का भी इंतजाम है। इस बारे में प्रभारी स्टेशन अधीक्षक एसके यादव का कहना है कि आइसोलेशन ट्रेन वाशिग लाइन में खड़ी हैं। इसके उपयोग के बारे में रेलवे बोर्ड और डीआरएम स्तर के अफसर ही कुछ बता सकते हैं।

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