अब नेजल एस्परजिलोसिस का खतरा

स्टेरॉयड नॉन स्टराइल वॉटर है जिम्मेदार

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नई दिल्ली

अभी तीन रंग के फंगस संक्रमण से निजात मिली नहीं थी कि एक और मुसीबत सामने आ गई है। इस बार खबर गुजरात के वड़ोदरा शहर से आई है, जहां पर कोविड पॉजिटिव मरीज और इससे ठीक हुए लोगों में एक और आक्रामक संक्रमण एस्परजिलोसिस के मामले सामने आए हैं। एक अंग्रेजी अखबार मंे छपी खबर के मुताबिक वड़ोदरा में म्यूकरमाइकोसिस के 262 मरीज जिनका सरकारी अस्पताल -एसएसजी और गोत्री मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। उनमें से बीते एक हफ्ते में एसएसजी के आठ मरीजों में एस्परजिलोसिस के लक्षण सामने आए हैं। फंगल इन्फेक्शन के बढ़ते मामलों के पीछे एक वजह कोविड मरीजों के इलाज के लिए स्टेरायड का इस्तेमाल, साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई में नमी बनाए रखने के लिए नॉन स्टरॉइल वॉटर के उपयोग को माना जा रहा है। कोविड-19 के लिए शहर की सलाहकार डॉ. शीतल मिस्त्री ने बताया कि ‘पल्मोनरी एस्परजिलोसिस, कम इम्यूनिटी वाले मरीजों में दिखना आम बात है, लेकिन साइनस में एस्परजिलोसिन मिलना नई बात है, हमें ऐसे मरीज जिनका कोविड का इलाज चल रहा है या जो ठीक हो चुके हैं, उनमें ऐसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। राइनो ऑरबिटल सेरिब्रल पैसेज में फंगल इन्फेक्शन इन दिनों ज्यादा आक्रामक हो गया है।’ मिस्त्री का कहना है कि फंगल इन्फेक्शन प्राकृतिक तौर पर बढ़ता है और ग्लूकोज इनके लिए खाने का काम करता है, इसलिए ऐसे मरीज जिन्हें डायबिटीज हो, जिन्हें कोविड-19 के इलाज के लिए स्टेरॉयड दिया गया हो और जिनमें इस वजह से शुगर बढ़ रही हो, उनमें फंगल इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है।

 साथ ही हमने पाया है कि खून में लिम्फोसाइट्स की कमी (लिम्फोपीनिया) जिससे इम्यूनिटी कमज़ोर होती है वो भी फंगल इन्फेक्शन का कारण बनती है.’

एस्परजिलोसिस को फिलहाल रंग से वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है. वर्तमान में ये अलग रंग में नज़र आ रहा है. कुछ मामलों में ये भूरा, भूरा-हरा, पीला-हरा, हरा और यहां तक की ग्रे रंग में भी दिख रहा है. जहां तक इसके इलाज की बात है तो इसके लिए भी ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होने वाली एम्फोटेरिसिन-बी ही इस्तेमाल की जा रही है.


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