बंगाल में ममता की हैट्रिक, असम में फिर भाजपा सरकार

तमिलनाडु में डीएमके+ को बहुमत, पुडुचेरी में खिला कमल, केरल में LDF


नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, असम में भाजपा और केरल में लेफ्ट की एक बार फिर वापसी होती दिख रही है, जबकि तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन और पुडुचेरी में एनडीए की सरकार बनना लगभग तय है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी की एक बार फिर सरकार बन रही है। राज्यपाल ने ममता बनर्जी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है संभव: आज वह गवर्नर से मुलाकात कर अपनी सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती हैं।  

पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का सपना देख रही भाजपा को करारा झटका लगा है। वह दो सौ पार का नारा लगाकर चुनाव मैदान में थी लेकिन रुझान और परिणाम में वह 80 सीटों के अंदर ही सिमट गई है। 

टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्यादातर दलबदलुओं को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि भाजपा के कई सांसद विधानसभा सीटें नहीं जीत पाए।

असम में भाजपा  की दोबारा बन रही सरकार

असम में एक बार फिर भाजपा  की सत्ता में वापसी हो रही है। अब तक हुई काउंटिंग में भाजपा के खाते में 74 सीटें जाती दिख रही हैं, वहीं कांग्रेस गठबंधन 51 सीटों पर बढ़त बनाए था। खबर लिखे जाने तक असम में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है, जबकि कांग्रेस लाख कोशिशों के बावजूद बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। भाजपा की इस जीत से यह साबित हुआ है कि यहां पर सीएए के पक्ष में लोग खड़े हैं। 

तमिलनाडु में चला डीएमके का जादू

तमिलनाडु में देर शाम तक रुझानों और परिणामों के आधार पर तय हो गया था कि यहां पर डीएमके गठबंधन की सरकार बन रही है। इस प्रदेश में एडीएमके और डीएमके के बीच मुख्य मुकाबला होने की बात कही जा रही थी लेकिन रुझानों और परिणामों के बाद डीएमके को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखा। यहां पर द्रमुक गठबंधन को 156 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि एडीएमके गठबंधन को 77 के आस-पास सीटें मिल सकती हैं।  

केरल में लेफ्ट की दोबारा वापसी, बदल दिया इतिहास

केरल में एक बार फिर लेफ्ट सरकार की वापसी हो रही है। पांच साल बाद सरकार बदल जाने की परंपरा इस बार टूट गई है और राज्य में एक बार फिर लेफ्ट की सरकार बनती दिख रही है। भाजपा  की ओर से मेट्रो मैन चुनावी मैदान में थे।  लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले इस राज्य में भाजपा के पास एक सीट थी लेकिन इस बार यहां पर भाजपा  का खाता खुलता नहीं दिख रहा है।

पुडुचेरी में एनडीए आगे

पुडुचेरी में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा गठबंधन के बीच था। खबर लिखे जाने तक एनडीए के खाते में 16 सीटें जाती दिख रहीं थीं, यूपीए की झोली में 8 सीटें गिरने का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के बड़े-बड़े नेताओं को तोड़कर भाजपा में लाने और चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने के बाद भी भाजपा 100 सीट नहीं जीत सकी। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि तीन नेताओं को छोड़कर टीएमसी से इस्तीफा  देकर भाजपा  में शामिल हुए सारे विधायक चुनाव हार गए। टीएमसी से भाजपा  में शामिल होकर विधानसभा चुनाव लड़े जो तीन नेता जीत सके उनमें सबसे पहला नाम नंदीग्राम से जीते सुवेंदु अधिकारी का है।

टीएमसी से 2017 में ही भाजपा  में पहुंचे मुकुल रॉय भी कृष्णानगर सीट जीत गए हैं जहां उन्होंने टॉलीवुड एक्टर कौशानी मुखर्जी को हराया। उत्तर बंगाल में नाटाबाड़ी सीट से टीएमसी विधायक रहे मिहिर गोस्वामी जीत गए हैं जो नवंबर, 2020 में भाजपा  में आए थे।

2017 के बाद से टीएमसी के 37 विधायकों समेत करीब 140 नेताओं ने भाजपा का दामना थामा। इनमें कई ऐसे भी थे जिन्होंने 2020 के अंत में और 2021 की शुरुआत में भाजपा  में एंट्री ली लेकिन उनको टिकट मिल गया। लेकिन चाहे वो सिंगुर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी हों या रवींद्रनाथ भट्टाचार्य हों या फिर मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय, सब हार गए। टीएमसी से भाजपा  में आए विधायकों में बाली से  वैशाली डालमिया, डायमंड हार्बर से दीपक हलदर, उत्तरपाड़ा से प्रबीर घोषाल और कालना सीट से बिश्वजीत कुंडु भी चुनाव हार गए। 


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