मराठा आरक्षण : फैसले की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की समिति

ashok chavan

मुंबई

शनिवार को सह्याद्रि गेस्ट हाउस में मराठा आरक्षण को लेकर गठित कैबिनेट उपसमिति की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक के बाद उपसमिति के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव सोमवार से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) श्रेणी के लिए लंबित भर्ती प्रक्रिया का जायजा लेंगे।

चव्हाण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर 2020 तक हुई नियुक्तियों को संरक्षित किया है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में दो प्रमुख बातें चयन और नियुक्ति हैं। ऐसे में पूर्ण और अपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव संबंधित विभागों के सचिवों के साथ तत्काल बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मराठा आरक्षण पर रोक के फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों को न्याय देने के लिए सरकार अनुकूल है और मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद आगे के फैसले लिए जाएंगे।

चव्हाण ने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के साढ़े पांच सौ से अधिक पेज के फैसले पर विस्तृत विश्लेषण के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अगले दो दिनों में छह से सात सदस्यों की समिति बनाई जाएगी। यह समिति बारीकी से फैसले का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तथा उपलब्ध कानूनी विकल्पों से सरकार को अवगत कराएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति की रिपोर्ट अगले 15 दिनों में मिल जाएगी। चव्हाण ने कहा कि पुनर्विचार याचिका के संदर्भ में समिति की सिफारिश के अनुसार फैसला लिया जाएगा। चव्हाण ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 102वें संविधान संशोधन की वजह से राज्यों को आरक्षण देने का अधिकार नहीं है, लेकिन इसके पहले संसद की विशेषाधिकार समिति ने कहा था कि संविधान संशोधन से राज्यों के अधिकार बाधित नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान, अटॉर्नी जनरल ने शुरू में कहा कि राज्यों के पास कोई अधिकार नहीं है, लेकिन बाद में सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि राज्यों के पास अधिकार है। अंत में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 3 के विरुद्ध 2 मत से फैसला सुनाया कि राज्यों को आरक्षण देने का अधिकार नहीं है। बैठक में चर्चा हुई कि यदि राज्य के पास अधिकार नहीं है तो केंद्रीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखेंगे।  

उन्होंने कहा कि नौकरी प्रक्रिया के बारे में राज्य भर के एसईबीसी उम्मीदवारों को हर दिन बहुत सारे फोन कॉल मिल रहे हैं। ऐसे उम्मीदवारों की दिक्कतों को दूर करने के लिए सभी जिलों के अतिरिक्त जिला कलेक्टर विशेष परिचालन अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। यदि जिला स्तर पर इसका समाधान नहीं होता है, तो इस मामले को मुख्य सचिव के पास ले जाया जाएगा और इस पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। गृहमंत्री दिलीप  वलसे पाटिल ने कहा कि मराठा आरक्षण बेहद महत्व का मुद्दा है। इसमें किसी को भड़काऊ बयानबाजी कर समाज में वैमनस्य नहीं पैदा करना चाहिए। इस संबंध में पुलिस स्थिति पर नजर रख रही है। नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठा समाज को न्याय देने के लिए सरकार कटिबद्ध है।

कोई ठोस निर्णय नहीं : पाटिल  

मराठा आरक्षण को लेकर हुई कैबिनेट उपसमिति की बैठक पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि इसमें कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। संपूर्ण मराठा समाज इस बैठक को आशा की नजरों से देख रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में रिव्यु पिटीशन दाखिल करनी चाहिए।

चुने गए लोगों को तत्काल नौकरी दी जाए: संभाजी राजे

इसके पहले सांसद संभाजी राजे भोसले ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मांग की थी कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में चुने गए मराठा उम्मीदवारों को तत्काल सेवा में शामिल किया जाए।


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