संगम पर स्नान से अधिक अस्थि विसर्जन को आ रहे लोग

प्रयागराज|

स्था का केंद्र गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती का पवित्र संगम भी कोरोना से हो रही मौतों से उदास है। कोरोना ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि इन दिनों संगम पर स्नान करने वालों से अधिक अस्थि विसर्जन करने वालों की भीड़ लग रही है।  एक तरफ श्मशान घाटों पर शवों की कतार तो दूसरी तरफ संगम पर अपनों के मोक्ष की आस लिए परिजनों की भीड़ देख हर किसी की आंखें नम हो रही हैं। तीर्थ पुरोहितों की मानें, तो कोरोना से पहले आम दिनों में औसतन 100 अस्थि कलश संगम में विसर्जन के लिए आते थे। लेकिन पिछले तकरीबन एक महीने से 300-400 लोग अस्थियां लेकर पहुंच रहे हैं। सप्ताहांत में लॉकडाउन के दौरान 300 के आसपास तो अन्य दिनों में 400 से अधिक अस्थियां विसर्जन होने आ रही हैं। बड़ी संख्या में मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली से भी लोग पवित्र संगम में अस्थियां विसर्जन के निमित्त पहुंच रहे हैं। हालत यह है कि संक्रमण के डर से इतने तो नियमित स्नान करने वाले आस्थावान भी संगम तट पर नहीं पहुंच रहे हैं। सुबह में संगम के पास पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं बच रही है। सोमवार को शाहजहांपुर से अपने 110 वर्षीय पिता हजारी का कलश लेकर पहुंचे राम सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के कारण आने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन पिताजी की अस्थियां संगम में प्रवाहित न करते तो जीवनभर खुद को माफ नहीं कर पाते।


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