नेपाल के सियासी संकट पर भारत सरकार का जवाब

पड़ोसी और दोस्त के नाते खड़े हैं साथ


नई दिल्ली

नेपाल में ताजा सियासी घटनाक्रम, संसद को भंग करने के पीएम केपी शर्मा ओली के फैसले और पार्टी के भीतर जारी घमासान को भारत ने पड़ोसी देश का आंतरिक मामला बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि इन मुद्दों से देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से निपटा जाएगा। पिछले सप्ताह केपी ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने प्रतिनिधि सभा को भंग करके नवंबर में आम चुनाव का ऐलान कर दिया, लेकिन इसके बाद से यहां बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बुधवार को कहा कि हमने नेपाल में हाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों को देखा है। हम इन्हें नेपाल के आंतरिक मामलों की तरह देखते हैं और हमारा मानना है कि इसे देखकर अपने घरेलू ढांचे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से निपटा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि एक पड़ोसी और दोस्त के रूप में भारत नेपाल और उसके लोगों की प्रगति, शांति, स्थिरता और विकास की यात्रा पर उनके साथ अडिग है।

2018 में केपी ओली की अगुआई में वाम दल के सत्ता में आने के बाद भारत-नेपाल रिश्तों में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले। उन्होंने नेपाल को चीन के अधिक नजदीक लाने की कोशिश और इस क्रम में पिछले साल भारत के साथ सीमा विवाद को भी भड़काया। ओली ने देश के राजनीतिक नक्शे में संशोधन करते हुए इसमें भारतीय इलाकों लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को भी शामिल कर लिया।


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