आईसीयू-वेंटिलेटर की कमी से , दम तोड़ रहे कोरोना संक्रमित

पटना

चाहे मरीजों का ऑक्सीजन स्तर घटे या फिर अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर। दोनों की परिस्थितियों में परेशानी मरीजों को उठानी पड़ रही है। पटना के अस्पताल ऐसे मरीजों को भर्ती करने से साफ इंकार कर रहे हैं। कारण उनके पास आईसीयू बेड नहीं हैं। ऐसे मरीज अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस में ही जिंदगी और मौत के बीच जूझने को विवश हैं। कई भर्ती होने के इंतजार में ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की फटकार के बाद पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में बढ़े बेड का कोई फायदा गंभीर मरीजों को नहीं मिल रहा है, क्योंकि आईसीयू बेड जस की तस हैं। आरा के किसी गांव से आए कोरोना संक्रमित राहुल कुशवाहा के परिजन आईजीआईएमएस के बाहर दहाड़ मारकर रो रहे थे। पूछने पर पता चला कि गंभीर हालत में उन्हें एक निजी अस्पताल ने आईजीआईएमएस में भेज दिया। अब यहां आईसीयू बेड की उपलब्धता नहीं होने पर उन्हें भर्ती नहीं लिया गया। राहुल की मौत हो गई। 

परिजनों ने बताया कि 33 साल का राहुल अपने परिवार का इकलौता लड़का था। पीएमसीएच में आए दिन कई मरीज आईसीयू की कमी के कारण दम तोड़ रहे हैं। वहां कार्यरत एक वरीय डॉक्टर ने बताया कि केवल 25 बेड का आईसीयू है और प्रतिदिन लगभग 40 से 50 ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनकों आईसीयू की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीज बिना इलाज के दम तोड़ रहे हैं। पीएमसीएच में कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. अरुण अजय ने बताया कि जितनी क्षमता है, उतना आईसीयू बेड पर भर्ती लिया जा रहा है। अगर कोई ऑक्सीजन के सपोर्ट पर ठीक हो सकता है तो ऐसे मरीजों को लौटाया नहीं जाता है।  

आईसीयू के इंतजार में तड़प रहा मरीज

राज्य के अलग-अलग जिले से आकर किसी तरह आईजीआईएमएस में भर्ती कई मरीज गंभीर हालत में आईसीयू के इंतजार में तड़प रहे हैं। भागलपुर से आई सुमित्रा देवी हों या पटना के सुभग कुमार (बदला हुआ नाम) दोनों मरीज सामान्य वार्ड में भर्ती हैं। आईसीयू के लिए अधीक्षक व अन्य डॉक्टरों से इनके परिजन गुहार लगा रहे हैं।


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