मराठा आरक्षण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू


मुंबई

बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान मराठा समाज को आरक्षण देने से इंकार कर दिया। न्यायालय के इस फैसले के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। समाज को आरक्षण नहीं मिलने पर राज्य की सत्ताधारी पार्टी जहां केंद्र सरकार को जिम्मेदार बता रही है, वहीं विपक्षी दल भाजपा इसे सरकार की नाकामी बता रही है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने निराशा व्यक्त करते हुए समाज से शान्ति बनाए रखने का आव्हान किया है। ठाकरे ने कहा कि मराठा समाज के स्वाभिमान को बरकरार रखने के लिए ही आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया है। राज्य के विधि मंडल में सभी राजनीतिक  दलों के एकमत पारित आरक्षण पर  सर्वोच्च न्यायालय ने पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि गायकवाड समिति की सिफ़ारिशों को लेकर राज्य सरकार के निर्णय को भी सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकृत कर दिया है। 

न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को आरक्षण देने का  अधिकार  नहीं है, यह केवल केंद्र सरकार और राष्ट्रपति को है। 

अशोक चव्हाण और नवाब मलिक झूठ बोल रहे हैं : फड़नवीस

सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को रद्द कर दिया है। राज्य की सत्ताधारी पार्टियां इसका जिम्मेदार केंद्र की भाजपा सरकार को ठहरा रही हैं, जिसका जवाब देते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर बनी उपसमिति के अध्यक्ष और मंत्री अशोक चव्हाण और नवाब मलिक पर जमकर निशाना साधा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए फड़नवीस ने कहा कि न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखने में सरकार विफल साबित हुई है, जिसके कारण समाज को आरक्षण नहीं मिल पाया। अशोक चव्हाण और नवाब मलिक को झूठा बताते हुए उन्होंने कहा कि 102 वें संशोधन को लेकर दोनों मंत्रियों ने जो बयान दिया है, वो पूरी तरह झूठा और जनता को गुमराह करने वाला है। फड़नवीस ने कहा कि आरक्षण पारित होने के बाद मुंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान हमारी सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया था कि यह कानून पहले पारित हो चुका है, इसलिए यह अधिनियम 102 वें संशोधन से प्रभावित नहीं होगा। राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए फड़नवीस ने कहा कि आरक्षण को लेकर गैरजिम्मेदार बयान दे रही है। हमारी सरकार ने समाज को आरक्षण देने का काम किया था, इसके साथ -साथ न्यायालय ने भी उसे मान्य किया था, लेकिन दुर्भाग्यवश राज्य की महाविकास आघाड़ी की सत्ता आने के बाद न्यायालय में समन्वय के अभाव में समाज को आरक्षण नहीं मिल सका। मलिक और चव्हाण द्वारा बार -बार केंद्र सरकार को एक पिछड़ा आयोग गठित करने पर फड़नवीस ने कहा कि मलिक और चव्हाण को यह मालूम होना चाहिए कि केंद्र सरकार ने भगवानलाल साहनी की अध्यक्षता में पिछड़ा आयोग का गठन किया है। इसलिए दोनों मंत्रियों को राज्य की जनता को गुमराह और गलत बयान नहीं देना चाहिए। 

शिवसेना को बोलने का अधिकार नहीं

फड़नवीस ने कहा कि मराठा आरक्षण के संबंध में शिवसेना को बोलने का अधिकार नहीं है, क्योंकि शिवसेना के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके पार्टी के मंत्रियों को विश्वास में लेकर युति सरकार में आरक्षण पारित किया गया था। फड़नवीस ने कहा कि राज्य की भाजपा और शिवसेना की युति सरकार में समाज को आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था। उस समय शिवसेना सरकार की सहयोगी थी, इसलिए आरक्षण रद्द होने पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।


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