हम विकास के विरोधी नहीं : सीएम उद्धव ठाकरे

प्रकृति का संरक्षण कर विकास कार्यों की सलाह देने वाली संस्था हो गठित 


मुंबई

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में एक ऐसी संस्था का गठन किया जाए जो यह बताए कि विकास कार्यों करते समय प्रकृति का संरक्षण कैसे किया जाए तथा इसके लिए तकनीकी और वैज्ञानिक सलाह भी प्रदान करे। इसकी सलाह मानना भी अनिवार्य हो। इस तरह की संस्था बनाने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य होना चाहिए। ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर वन विभाग की तरफ से आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण में लक्ष्मण को बचाने के लिए संजीवनी लानी पड़ी। मेरा मानना है कि अपने साथ रहने वाली और हमें जीवित करने वाली बात ही संजीवनी है। हमें इसे संजोना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम विकास के नाम पर पर्यावरण को खराब कर रहे हैं, इसलिए जब वनों की कटाई कर विकास कार्यों के प्रस्ताव हमारे पास आते हैं, तो हम इसका विरोध करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि हम विकास के विरोधी हैं, बल्कि यह कि हम प्रकृति के अनुकूल विकास की अवधारणा को स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि क्या मानव बस्तियों पर कभी वन्य जीवों ने अतिक्रमण करते देखा है? यह सुना है कि उन्होंने एकाध इमारत खाली कर उसमें रहने की शुरुआत की है? नहीं। लेकिन मनुष्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर अतिक्रमण कर रहा है।

जनभागीदारी बढ़ाकर संरक्षण के लिए किया जाए काम

पिछले साल निवर्ग चक्रवात आया था, इस साल तौकते चक्रवात आया। जब कोई तूफान आता है तो हम जलवायु परिवर्तन का कारण बताते हैं, लेकिन क्या हम इस पर गंभीरता से विचार करते हैं कि जलवायु परिवर्तन किन कारणों से होता है। जैव विविधता क्षेत्र में पशुओं और पौधों का पंजीकरण किया जाना चाहिए, बल्कि जन जागरूकता भी की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनभागीदारी बढ़ाकर इसके संरक्षण के लिए काम किया जाए।


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