कोरोना काल में बढ़ाएं अपनी मनोवैज्ञानिक इम्यूनिटी

yogasan

जब हमारा हाथ कट जाता है तो वह स्वतः थोड़े अंतराल के बाद ठीक हो जाता है। क्यों? क्योंकि यह हमारे शारीरिक इम्यून सिस्टम की एक क्रिया है जो स्वतः हमारे चाहने या न चाहने के बावजूद काम करती है। इसी तरह हमारे अंदर फिजिकल इम्यूनिटी (शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता) ही नहीं मनोवैज्ञानिक इम्यूनिटी भी है। 

अगर हम गुस्सा हैं तो थोड़े समय में शांत हो जाते हैं, उदासी है तो भी, बेचैनी और द्वंद से भी हम निकल कर बाहर आ जाते हैं। विपरीत परिस्थिति से बाहर निकलने की यही प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक इम्यूनिटी कहलाती है। जो फिजिकल इम्यूनिटी की तरह ही काम करती है। और यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वह अपनी मनोवैज्ञानिक इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए किस तरीके से प्रयास करता है।

इस वैश्विक महामारी के काल में हर व्यक्ति को इसके लिए प्रयासरत होना पड़ेगा। उन्हें मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत है। क्योंकि एक संतुलित जिंदगी आप तभी जी सकते हैं, जब आप की फिजिकल और साइकोलॉजिकल इम्यूनिटी संतुलित हो। याद रखना होगा, हमारे मन की स्थिति परिस्थिति पर निर्भर नहीं होती बल्कि हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, और हमारे समस्या समाधान के लिए चुने गए विकल्पों पर निर्भर करती है।

उदाहरण स्वरूप, हम देख सकते हैं कि एक घर में अगर 5 सदस्य हैं और एक समस्या आएगी तो समस्या के प्रति घर के हर सदस्य का दृष्टिकोण अलग होगा। किसी को यह समस्या बहुत बड़ी लगेगी, किसी को यह समस्या छोटी लगेगी, किसी को बहुत मामूली और कोई समस्या पर ध्यान भी नहीं देगा। जिसको समस्या ज्यादा बड़ी लगेगी वह ज्यादा परेशान होगा, जिसको कम लगेगी वह कम परेशान होगा, और जिसे थोड़ी भी बड़ी नहीं लगेगी वह बिल्कुल भी परेशान नहीं होगा। अतः, समस्या बड़ी है या छोटी है यह हमारे समस्या के प्रति दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

सुझाव

  • अपनों के साथ बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान करिए।
  • जानवरों और पेड़ों की देखभाल करिए उनके साथ समय बिताएं।
  • शारीरिक दूरी बनाने पर ध्यान दें लेकिन सामाजिक रूप से दूर न हों।
  • सकारात्मक मनोवृत्ति, सकारात्मक भावनाओं का अभ्यास करते रहें।
  • दिनचर्या को नियमित और उत्पादक पूर्ण बनाए रखिए।
  • किसी तात्कालिक परेशानी से घबराकर जिंदगी में कोई स्थायी निर्णय लेने से बचें।

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