वैक्सीन की आपूर्ति हो सुनिश्चित

देश में धड़ाधड़ वैक्सीनेशन केंद्र खुल रहे हैं। राजनीतिक दलों में भी इस बिंदु पर सक्रियता बढ़ी है। यह अच्छी बात है। शुरुआत में वैक्सीन को लेकर जिस तरह की आशंका राजनीतिक दलों व्यक्त की जा रही थी। अफवाहों का जो बाजार गर्म था, करोड़ों लोगों के वैक्सीनेशन के बाद और कोरोना की दूसरे की विभीषिका के बाद अब लोगों को इसकी महत्ता समझ रही है और 18 से 44 तक के आयु वर्ग को वैक्सीनेशन की हरी झंडी मिलने के साथ वैक्सीनेशन केंद्रों के बढ़ाने की जरूरत  है, लेकिन जब अभी वैक्सीन ही उपलब्ध नहीं है और जितने केंद्र चालू है, वही पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लोगों को  परेशानी हो रही है, तो ऐसे में और केंद्र बढ़ाने का औचित्य क्या है। वैक्सीन की आपूर्ति बढ़े। इस दिशा में केंद्र और राज्य दोनों सक्रिय है। देसी वैक्सीन निर्माता अपनी क्षमता बढ़ाने का प्रयास युद्ध स्तर पर कर रहे हैं, जबकि केंद्र की और से कई विदेशी वैक्सीनों हरी झंडी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। जल्द ही  देशी दोनों वैक्सीनों के अलावा अन्य कई वैक्सीन नागरिकों के लिए उपलब्ध होगी, तब तक इस टीकाकरण के पूरे क्रियाकलाप का इस तरह नियोजन और संचालन जरूरी है, जिससे केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ ना हो। टीकों की उपलब्धता के अनुपात में  ही लोग टीकाकरण केंद्र पर पहुंचे। अब सबकी समझ में आ चुका है कि इस महामारी से यदि बचना है, तो सावधानी के साथ- साथ टीका लगवाना जरूरी है। देश और दुनिया में इतनी तादाद में लोगों का टीकाकरण हो चुका है और उसमें वैसा कोई कुप्रभाव नहीं हुआ जैसा इसकी शुरुआत में बिघ्न संतोषियों द्वारा व्यक्त किया जा रहा था, तो अब देश में लोग बेझिझक टीका लगवाने के लिए आगे आ रहे हैं। आवश्‍यक है कि अब केंद्र और राज्य सरकार वैक्सीन की आवश्‍यक आपूर्ति सुनिश्चित करे। खाली  केंद्र बढ़ने से काम नहीं चलेगा, वहां वैक्सीन भी पर्याप्त मात्र में होनी चाहिए, तभी बात बनेगी।   


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