मुजफ्फरपुर में डॉक्टरों की भारी कमी

मेडिकल स्टॉफ के भरोसे कोरोना से जंग

मुजफ्फरपुर

कोरोना के कहर से मुजफ्फरपुर में त्राहिमाम मचा है। मरीजों को न तो अस्पतालों में बेड मिल पा रहा है और न ही उनका समुचित इलाज हो रहा है। सरकारी अस्पतालों का हाल यह है कि वहां स्वास्थ्यकर्मी तो हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। जिले की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे चल रही है। 

एसकेएमसीएच से लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग में सृजित पदों की तुलना में आधे पद पर भी चिकित्सक बहाल नहीं हैं। एसकेएमसीएच में उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां 480 चिकित्सकों के पद हैं, जिसमें सिर्फ 164 चिकित्सक कार्यरत हैं। 37 लैब टेक्नीशियन के पद हैं, जबकि महज 17 लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं। शेष सभी पद खाली है। कोरोना काल में परिजनों की ओर से लगातार डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही बरतने के कारण कोविड मरीजों की मौत होने का आरोप लगाया जा रहा है। एक कारण यह भी है कि एसकेएमसीएच के कोविड वार्ड में 40 से अधिक डॉक्टरों की आवश्यकता है, लेकिन वहां सिर्फ 10 चिकित्सक ही तैनात हैं। कोरोना वार्ड में इलाज करने वाले चिकित्सकों की बेहद कमी है।

जेलों में डॉक्टरों की होगी बहाली

बिहार के विभिन्न केंद्रीय, मंडल और उप काराओं की चिकित्सा व्यवस्था को और बेहतर करने के लिए 70 डॉक्टरों की बहाली की जाएगी। बहाली वॉक इन इंटरव्यू पर होगी। प्रक्रिया 10 से 13 मई के बीच होगी। सभी बहाली संविदा (11 महीने) पर होगी। सभी आवेदक के मोबाइल में आरोग्य सेतु एप होना अनिवार्य है। 


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