ज्‍वेलर कम्‍युनिटी को आसान कर्ज मुहैया कराएगी आईसीआईसीआई


मुंबई

गोदरेज एंड बॉयस ने यह घोषणा की है कि भारत के अग्रणी सुरक्षा समाधान प्रदाता गोदरेज सिक्‍योरिटी सॉल्‍यूशंस (जीएसएस) ने आईसीआईसीआई बैंक के साथ भागीदारी में भारत की ज्‍वेलर कम्‍युनिटी के लिए वित्तीय सहायता का एक प्रोग्राम लॉन्‍च किया है। जीएसएस भारत में पहला ब्राण्‍ड बन गया है, जो भारत की ज्‍वेलर्स कम्‍युनिटी की सहायता के लिए ऐसा प्रोग्राम लागू कर रहा है और उन्‍हें अपने स्‍टोर के लिए नए युग के सुरक्षा समाधानों में निवेश करने के लिए प्रोत्‍साहित कर रहा है।

यह फाइनेंस प्रोग्राम रिटेल ज्‍वेलर्स के लिए गोदरेज सिक्‍योरिटी सलूशंस के द्वारा पेश की गई एक अनूठी ऋण सुविधा है। इस ऋण सुविधा से ज्‍वेलरी स्‍टोर्स के मालिक टॉर्च और टूल के लिए प्रतिरोधी अलमारियों में निवेश कर सकेंगे, जो आभूषण, नगदी और दस्‍तावेज जैसी उनकी बहुमूल्य संपत्तियों को सुरक्षित रखेंगी। चूंकि टॉर्च और टूल के लिए प्रतिरोधी अलमारियां महंगी होती हैं, इसलिए भावी ज्‍वेलर्स जीएसएस के किसी भी चैनल पार्टनर से जुड़कर आसान ईएमआई पर यह अलमारियां खरीद सकते हैं और एक ही बार में हो सकने वाले भारी निवेश से बच सकते हैं। मौजूदा ज्‍वेलर्स भी गोदरेज सिक्‍योरिटी सलूशंस के स्‍थानीय चैनल पार्टनर्स या सेल्‍स टीम के माध्‍यम से यह सुविधा ले सकते हैं। इसके बाद चैनल पार्टनर्स या सेल्‍स टीम उन्‍हें सीधे आईसीआईसीआई की टीम से जोड़ देगी। इस ऋण सुविधा के लिये ब्‍याज की दर 16% प्रतिवर्ष है और प्रोसेसिंग शुल्‍क 1.5% है। ऋण राशि न्‍यूनतम एक लाख रुपए से शुरू होती है और अधिकतम 10 लाख रुपए हो सकती है। इस साझेदारी के विषय में गोदरेज सिक्‍योरिटी सलूशंस के वाइस प्रेसिडेंटपुष्‍कर गोखले ने कहा कि, “गोदरेज सिक्‍योरिटी सलूशंस ने हमेशा भारत के ज्‍वेलर्स के साथ सहयोग किया है, ताकि उन्‍हें सुरक्षा समाधान अपनाने और अपग्रेड करने में मदद मिल सके। जेम्‍स ऐंड ज्‍वेलरी सेक्‍टर भारत के सबसे ज्‍यादा राजस्‍व अर्जित करने वाले सेक्‍टरों में से एक है और लूट और चोरी जैसे बाहरी खतरों के लिए सबसे असुरक्षित भी है। ज्‍वेलर्स के साथ निकटता से काम करने के कारण हम समझते हैं कि सुरक्षा समाधानों को अपग्रेड करने में पूँजी की जरूरत होगी और यह इस चुनौतीपूर्ण समय में कठिन होगा। फिर भी यह महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि सोने के दाम बढ़ने से ज्‍वेलरी के दाम बढ़ेंगे और उसे सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।”


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