ऐसी लापरवाहियां ही समस्या की जड़ हैं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अभी भी सिर्फ देश के 14 प्रतिशत लोग से मास्क पहनते हैं, पचास प्रतिशत लोग मास्क पहनते ही नहीं और आधे से अधिक लोग सही तरीके से मास्क नहीं पहनते। लगभग साल भर से अधिक समय हो गया, जबसे यह महामारी शुरू हुई है, देश दूसरी लहर का सामना कर रहा है, तीसरी लहर भी दस्तक दे रही है। दूसरी लहर में ही बच्चों का संक्रमित होना शुरू हो गया है,मौत का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। लोग मास्क पहने, कोरोना उपयुक्त व्यवहार अपनाएं ,भीड़भाड़ से बचें, समय - समय पर हाथ धोते रहें,आपस में दूरी बना कर रहें, यह कहते - कहते  सरकार और प्रशासन थक गया है। अभियान चलाये गए हैं और चलाये जा रहे हैं, जुर्माना तक लगाया गया है। इसके बाद यदि देश भर में यह सूरते हाल  है कि आधे से अधिक आबादी अभी भी मास्क का उपयोग नहीं कर रही है और जो कर रहे हैं, उनमे भी आधे से कहीं ज्यादा उसका सही उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो इस ‌िस्थति को सिर्फ और सिर्फ शर्मनाक कहा जा सकता है। इसी कारण महामारी की विभीषिका हमारे देश में इतना रौद्र रूप अख्तियार कर पायी। लोग घरों में बंद हैं, रोजीरोटी खतरे में है, नाना प्रकार की परेशानी झेल रहे हैं, इसके बाद भी अगर लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं तो यह चुल्लू भर पाने में डूब मरने की बात है। हर कोई सरकार को कोस रहा है,चिकित्सा व्यवस्था को कोस रहा है और खुद उससे बचने के मापदंडों का पालन नहीं कर रहा है। इन सब लापरवाहियों  का नतीजा है कि अभी कोरोना से निजात नहीं मिली, ब्लैक फंगस ,वाइट फंगस और अन्य बीमारियां भी महामारी  बनकर हम पर अपनी गाज गिरा रही हैं । रोज हम अपनी आंखों से देख रहे हैं, माध्यमों पर सुन रहे हैं। इनके पाश में आने के बाद लोगों को अकथनीय दर्द का सामान करना पड़ रहा है, परिवार के परिवार साफ़ हो रहे हैं, फिर भी सबक नहीं ले रहे हैं। आखिर सरकार की एक मर्यादा है, अपनी बात छोड़ो बड़े- बड़े विक‌िसत अौर सक्षम राष्ट्र में जब यह माहमारी उफान पर थी, तो वहां क्या हालत थे, हम सबने देखा है। वे हम से कई गुना अधिक स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं, हमसे बहुत कम आबादी है और हमसे बहुत अधिक साधन सुविधाओं से सज्ज हैं, उन्हें भी इस की आवेग के आगे घुटने टेकने पड़े थे। हमारे यहां एक ऐसा बड़ा वर्ग है, जो यह सब देख सुन कर भी ऐसा व्यवहार कर रहा है, जैसा वह इंसान नहीं कोई दूसरे लोक का प्राणी है और वह कुछ भी करे उस पर इस महामारी का कोई असर नहीं होगा। वह इतना भी नहीं समझ रहे हैं कि ऐसा कर ये नादान अपना, अपने परिवार का अौर आसपास के लोगों का जीवन खतरे में डाल रहे हैं और महामारी को नियंत्रित नहीं होने दे रहे हैं।  लोगों का इलाज करते- करते चिकित्सक संक्रमित  हो रहे हैं, पुलिस और प्रशासन के लोग मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, जिससे लोग कोरोना के चपेट में ना आयें,  ऐसा करते समय कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं।  कम से कम हम इन पर रहम करें।  दूसरी लहर अब काबू में आ रही है। कारण सरकार और समाज के जागरूक लोग दोनों प्रयत्न की पराकाष्ठा कर रहे हैं,  इसके अलावा कोरोना योद्धा चिकित्सक और इस विभाग के अन्य कर्मी अपने जान की बाजी लगा कर लोगों का उपचार कर रहे हैं।  कम से कम हम अपनी मस्ती में इनके सद्प्रयासों को भी बर्बाद ना कर दें। यह जंग जितनी लम्बी चलेगी, देश की अर्थ व्यवस्था का ,देश के समाजिक ताने बाने का, बहुमूल्य मानव जीवन का उतना अधिक नुकसान  होगा, जिसकी भरपाई करने में बहुत समय लगेगा। यह महामारी जितना लंबा चलेगी, नुकसान उतना अधिक होगा और मारक होगा, जिसका भुगतान इस देश का नागरिक ही करेगा। हम हर वक्त इसका एहसास रखें और किसी भी तरह की ऐसी कोई लापरवाही ना करें, जिससे हम इस महामारी के प्रसार में  किसी भी तरह सहायक बने। कारण हमारी लापरवाही ना सिर्फ हमारा नुकसान करती है, बल्कि देश और समाज का भी नुकसान कर रही है, जिसकी भरपाई मुश्किल है।


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