दारुल उलूम के मौलाना नूर आलम का इंतकाल

मेरठ

इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद व अरबी भाषा के बड़े विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। 70 वर्षीय मौलाना आलम देश ही नहीं दुनिया भर में मौलाना अमीनी के हजारों शागिर्द हैं। मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी मौलाना नूर आलम खलील अमीनी दारुल उलूम में वरिष्ठ उस्ताद होने के साथ-साथ अरबी के बड़े विद्वानों में शामिल थे। वे पिछले काफी दिनों से बीमार थे। 

गौरतलब हो कि मेरठ के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार की देर रात उनकी तबीयत बिगड़ गई, उन्हें चिकित्सक के यहां ले जाया जाता उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। अरबी भाषा में सराहनीय सेवाओं के लिए मौलाना नूर आलम खलील अमीनी को वर्ष 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विशेष सम्मान से नवाजा था। उनके इंतकाल पर दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, नायाब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी, महासचिव मौलाना महमूद मदनी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना शकेब कासमी ने गहरा दुख जताया है।


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