प्रमोशन में आरक्षण पर लगे रोक को सरकार ने हटाया

ajit pawar

मुंबई

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण पर जो रोक लगाया था, उसे रद्द कर दिया है। पदोन्नति कोटे की रिक्त पड़ी 33 प्रतिशत आरक्षण की रोक हटाते हुए 25 मई, 2004 के नियमानुसार सभी पदों को भरने का आदेश जारी किया है। बुधवार को उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमे नौकरी पदोन्नति में आरक्षण पर लगाए गए रोक को हटाने का निर्णय लिया गया। सरकार के  इस फैसले से आरक्षण रद्द होने से परेशान मराठा समाज को बड़ी राहत मिली है। सरकार के इस निर्णय से जहां पिछड़ा वर्ग नाराज है। मराठा समाज से आने वाले सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों में ख़ुशी की लहर है। राज्य सरकार ने साढ़े तीन साल में प्रमोशन कोटे में रिक्त पदों को भरने का कोई फैसला नहीं लिया है,जिसके कारण बड़ी संख्या में खुली श्रेणी से आने वाले अधिकारी और कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। कुछ अधिकारी पदोन्नति के पात्र होने के बावजूद आरक्षण के लाभ से वंचित रह गए, क्योंकि सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। बता दें कि सरकार ने मराठा समाज और खुली श्रेणी से आने वाले अधिकारियों को वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन करने का निर्णय लिया था,जिसके खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। जिसमे सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सामान्य श्रेणी के लिए सरकारी नौकरी में आरक्षण पर रोक लगा दिया था,लेकिन प्रमोशन में आरक्षण पर रोक नहीं लगाया था। न्यायालय के इस फैसले के कारण पिछड़े समाज में भारी आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विशेष अनुमति मांगी थी लेकिन न्यायालय की तरफ से कोई निर्णय न आने और राजनितिक दवाब के कारण पिछले साढ़े तीन साल तक प्रमोशन कोटे में रिक्त पदों को भरने का कोई फैसला नहीं लिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा मराठा आरक्षण रद्द किए जाने के बाद समाज में पैदा हुए आक्रोश को  दूर करने के लिए राज्य सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण पर जो रोक लगाया हुआ था उसे रद्द  कर दिया। सरकार के इस निर्णय के अनुसार अब,पदोन्नति कोटे में 33 प्रतिशत आरक्षित पदों को वरिष्ठता के आधार पर भरने की अनुमति दी गई है और इस संबंध में निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि  पिछड़ा वर्ग के कर्मचारी अपनी सामान्य वरिष्ठता के अनुसार पदोन्नति के लिए पात्र होंगे।


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