मनपा आयुक्त चहल के एक साल पूरा

मुंबई

पिछले साल कोरोना महामारी जब मुंबई में तेजी से फैल रही थी, उसी समय आठ मई को राज्य सरकार ने उन्हें मनपा आयुक्त की बागडोर सौंपी। मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल शनिवार को अपना एक साल का कार्यकाल पूरा किया। इस एक  साल में कोरोना महामारी से लड़ाई लड़ते  हुए उन्होंने सराहनीय कार्य किया। उनके सरहानीय कार्य को लेकर देश की सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी पीठ थपथपाई । मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने भी शाबासी दी थी। इसके अलावा उनके कार्यकाल के दौरान  मुंबई में धारावी पैटर्न की पूरे विश्व मे गुणगान हुआ और डब्ल्यूएचओ ने भी इस पैटर्न को लेकर भारत देश का गुणगान किया था। इसके बावजूद मनपा आयुक्त को राजनेताओं के आरोपों का सामना करना पड़ा है। मनपा में स्थाई समिति की बैठकों से लेकर महापौर तक मनपा के  कामकाज को लेकर लताड़ लगा चुकी है। उल्लेखनीय है कि मार्च 2020 में कोरोना महामारी के फैलने की शुरुआत के बाद मई महीने में जब कोरोना पूरे पीक पर पहुंच गया था और बेकाबू होता नजर आने लगा। मनपा के सभी सिस्टम फेल होते नजर आने लगे थे, उस समय राज्य की महाविकास आघाडी सरकार ने तत्कालीन मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी का तबादला करते हुए इकबाल सिंह चहल को मनपा आयुक्त को कार्यभार सौंपा।  मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल मनपा आयुक्त बनते ही खुद मनपा की सायन, नायर और  केईएम अस्पताल में जाकर मरीजों से उनके चल रहे इलाज की जानकारियां लीं और खामियों को जाना। मनपा  द्वारा बड़ी मात्रा में जंबो कोविड  सेंटर तैयार करना और धारावी में मुख्य रूप से ध्यान दिया जो कि एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी के रूप में जाना जाता है।


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