बंगाल चुनाव में कांग्रेस को TMC से करना चाहिए था गठजोड़ : मोइली

अधीर रंजन को बताया कमजोर नेता

veerappa moily

बेंगलुरु
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने बुधवार को कहा कि हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहिए था. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को कमजोर नेता बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की. मोइली ने दिए साक्षात्कार में राज्य में कांग्रेस के सफाये के लिए गठबंधन संबंधी कारणों को जिम्मेदार ठहराया जहां उनकी पार्टी ने वाम दलों तथा इंडियन सेकुलर फ्रंट के साथ गठजोड़ किया था. उन्होंने कहा कि बनर्जी तृणमूल कांग्रेस बनाने से पहले कांग्रेस में थीं और ‘हमारी अपनी’ हैं. मोइली ने कहा कि भले ही उन्होंने पहले हमारे विधायकों को अपनी ओर खींच लिया हो, लेकिन पार्टी उनके साथ बेहतर गठजोड़ कर सकती थी. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री मोइली ने कहा, ‘जब वह भाजपा के खिलाफ लड़ रही हैं, तो हमारी सही साझेदार वही रहतीं.’ चौधरी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि वह जमीन से दूर हैं और उन्हें केवल ममता बनर्जी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाला नेता माना जाता है. उन्होंने कहा, ‘इसे हमारे लोगों और कार्यकर्ताओं ने पसंद नहीं किया. यहां तक कि हमारे मजबूत गढ़ों में भी हमारे मतदाता ममता की ओर चले गये जहां परंपरागत रूप से कांग्रेस जीतती थी.’ मोइली ने कहा, ‘और उन्हें (चौधरी को) कोई सजा नहीं दी गयी. वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने हुए हैं. लोकसभा में कांग्रेस के नेता बने हुए हैं.’ उन्होंने कहा, ‘अगर आप उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करोगे और जवाबदेह नहीं ठहराओगे तो पार्टी की फिक्र कौन करेगा?’ मोइली ने असम और केरल में विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा पेश नहीं करने को पार्टी की गलती बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने यही गलती चुनावों में उम्मीदवारों के चयन में की. उन्होंने कहा, ‘हम अनेक राज्यों में अपने नेताओं का चयन उनकी नकदी (संसाधन) जुटाने की क्षमता और उनकी जाति के लोगों को पार्टी के पक्ष में करने की क्षमता के आधार पर करते हैं. मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस इस तरह से चुनाव जीत सकती है.’ मोइली का मानना है कि जनता लंबे समय तक किसी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को देखकर वोट नहीं देती, बल्कि अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदार को देखना चाहती है।

 उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस एक गठबंधन से दूसरे में चली जाती है, लेकिन चुनावों के बाद पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कोई प्रयास नहीं करती.


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