भारत पहुंची स्‍पूतनिक V

कोरोना से लड़ने के लिए एक और हथियार

sputnikV

नई दिल्‍ली

पूरे देश में कोरोना वायरस के चलते लोग परेशान हैं। अस्‍पतालों में बेड और ऑक्सिजन की कमी की वजह से हर रोज मरीजों की जान जा रही है। इस बीच, टीकाकरण रफ्तार को और तेजी मिलने जा रही है। शनिवार को रूस से स्‍पूतनिक वी वैक्‍सीन की पहली खेप हैदराबाद पहुंच गई। बताया जा रहा है कि एक मई से ही टीकाकरण के तीसरे फेज में इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

आपको बता दें कि अभी तक टीकाकरण अभियान में कोविशील्‍ड और कोवैक्‍सीन का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। रूसी प्रत्‍यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के एक अधिकारी ने उम्‍मीद जताई कि रूस की यह वैक्‍सीन भारत को कोरोना महामारी की इस दूसरी लहर से बाहर निकालने में मदद करेगी। गौरतलब है कि शुरुआत में इस वैक्‍सीन की क्षमता पर प्रश्‍नचिह्न उठाए गए थे। बाद में इस साल फरवरी में ट्रायल के डेटा को जर्नल 'द लांसेंट' में प्रकाशित किया गया तो इसमें इस वैक्‍सीन को कारगार और पूरी तरह सुरक्षित बताया गया।

भारत में इस रूसी टीके की कीमत को लेकर कंपनी ने कहा है कि इसके एक डोज के अधिकतम साढ़े सात सौ रुपए खर्च करने होंगे। फिलहाल इस वैक्‍सीन की आधिकारिक कीमत का ऐलान नहीं हुआ है।

 अभी देश में जो दो वैक्‍सीन लोगों को लगाई जा रही हैं, उसे केंद्र सरकार 250 रुपए में खरीदती है। इस रूसी वैक्‍सीन की सप्‍लाई के लिए 60 से अधिक देशों ने कांट्रेक्‍ट साइन किए हैं। ऐसे में इसकी ग्‍लोबल रीच बहुत ज्‍यादा हो सकती है।

दोनों खुराकें एक-दूसरे से अलग

रूसी टीके स्‍पूतनिक वी के तीसरे चरण के परीक्षण में यह 91.6 पर्सेंट प्रभावी साबित हुई और कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं नजर आया। परीक्षण के करीब दो महीने बाद भारत ने अप्रैल में इस रूसी टीके के आपात इस्‍तेमाल को मंजूरी दे दी। स्‍पूतनिक वी एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन की तरह की एक वायरल वेक्‍टर वैक्‍सीन है। मगर किसी अन्‍य कोरोना वैक्‍सीन के विपरीत इस वैक्‍सीन की दोनों खुराकें एक दूसरे से अलग होती हैं।


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