जीडीपी का साइज घटकर रह गया 135 लाख करोड़ रुपए


नई दिल्ली

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़े के अनुसार देश का वास्तविक जीडीपी 2020-21 में घटकर 135 लाख करोड़ रुपए रहा, जो मार्च 2020 को समाप्त वित्त वर्ष में 145 लाख करोड़ रुपए था। अर्थव्यवस्था को 145 लाख करोड़ रुपए का स्तर प्राप्त करने के लिए 2021-22 में 10 से 11 फीसद वृद्धि की जरूरत होगी। लेकिन कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसको देखते हुए कई विशेषज्ञों ने अनुमान जताया कि तुलनात्मक आधार कमजोर रहने के बावजूद जीडीपी वृद्धि दर दहाई अंक में नहीं पहुंचेगी।

राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 9.3 फीसद रहा। यह वित्त मंत्रालय के संशोधित अनुमान 9.5 फीसद से कम है। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिये केंद्र सरकार के राजस्व-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में राजस्व घाटा 7.42 फीसद था। निरपेक्ष रूप से राजकोषीय घाटा 18,21,461 करोड़ रुपए बैठता है, जो फीसद में जीडीपी का 9.3 फीसद है।

सरकार ने फरवरी 2020 में पेश बजट में 2020-21 के लिए शुरू में राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपए या जीडीपी का 3.5 फीसद रहने का अनुमान जताया था। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में पिछले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा अनुमान को संशोधित कर 9.5 फीसद यानी 18,48,655 करोड़ रुपए कर दिया गया। कोविड-19 महामारी और राजस्व प्राप्ति में कमी को देखते हुए राजकोषीय घाटे के अनुमान को बढ़ाया गया।

मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है, लेकिन उन्होंने महामारी की आगे की राह को लेकर बनी हुई अनिश्चितता के बारे में आगाह किया। 

उन्होंने साथ ही कहा कि महामारी की वजह से पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि क्या मौजूदा वित्तीय वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर दोहरे अंकों में (दस या दस फीसद से ऊंची) होगी।


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