30 दिनों में 90% तक घट गए कोरोना के मरीज

भागलपुर

एक मई तक बिहार के भागलपुर जिले में कोरोना अपना विकराल रूप धारण कर चुका था। इस वक्त तक जिले में हर रोज 440 कोरोना संक्रमित मिल रहे थे, तो चार से पांच कोरोना मरीजों की मौत हो रही थी। वहीं कोरोना से ठीक होने की दर महज 79.14 प्रतिशत ही थी। एक मई को हर एक लाख की आबादी में एक शख्स कोरोना संक्रमित था। यानी इस दिन जिले की करीब 34 लाख की आबादी में से 0.11 प्रतिशत कोरोना पॉजिटिव थी। लेकिन एक माह में ही स्थिति बदल गई। महज 30 दिन में न केवल रोजाना संक्रमित होने वालों की औसत संख्या 22 पर आ गई, तो जिले में कोरोना के महज 416 सक्रिय मरीज रह गए। 

एक मई को जिले में कोरोना के 3850 कोरोना मरीज थे। इनमें से 897 कोरोना मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे थे, जबकि इस दिन तक जिले के सभी छह अस्पतालों के 144 बेड में से एक भी बेड कोरोना के मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं था। मायागंज अस्पताल में 100 बेड का एमसीएच कोरोना आइसोलेशन वार्ड, मेडिसिन वार्ड व 60 बेड का इमरजेंसी कोरोना वार्ड पूरी तरह से भर चुका था। आईसीयू में ये तो हाल था कि उस वक्त सामान्य वार्ड में गंभीर कोरोना संक्रमितों को भर्ती होकर आईसीयू में बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ता था। हर रोज आईसीयू से कहीं ज्यादा सामान्य वार्ड में कोरोना मरीज मर रहे थे। कारण, आईसीयू में बेड की कमी। लेकिन माह खत्म होते-होते कोरोना का कहर थम चुका है। 

31 मई यानी सोमवार को जिले के निजी अस्पताल तपस्वी नर्सिंग होम, श्रीराम हॉस्पिटल, ग्लोकल हॉस्पिटल, सीएनएम हॉस्पिटल, हिंडाल हॉस्पिटल, पल्स हॉस्पिटल के 144 बेड की तुलना में 99 बेड कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध था। वहीं अनुमंडलीय अस्पताल कहलगांव में 50 में से 48 बेड, अनुमंडलीय अस्पताल नवगछिया में 25 में से 25 बेड, डीसीएचसी, सदर अस्पताल के 70 ऑक्सीजनयुक्त बेड में से 65, 100 बेड के कोविड केयर सेंटर घंटाघर में सभी 100 बेड व मायागंज अस्पताल के 482 बेड में से 422 और 36 बेड के आईसीयू में चार बेड खाली हैं। 


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