सत्ता की मलाई खाने तीनों दल एक साथ: फड़नवीस

दो दिन के अधिवेशन पर जताई नाराजगीl जनता, लोकतंत्र की कुर्बानी देना दुर्भाग्यपूर्ण

fadanvis

मुंबई 

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़नवीस ने दो दिन के अधिवेशन के विरोध में तीव्र नाराजगी प्रकट करते हुए  मंगलवार को विधानमंडल कामकाज सलाहकार समिति की बैठक का बहिष्कार किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि किसान, सामान्य नागरिक, छात्र और समाज के विभिन्न लोगों की कई समस्याएं हैं, साथ ही मराठा सहित ओबीसी आरक्षण के लिए विशेष अधिवेशन की मांग हो रही थी, इसके बावजूद मात्र दो दिन का अधिवेशन आयोजित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 

तीन पार्टियों के झगड़े में जनता को गड्ढे में क्यों ढकेला जा रहा है? तीन दलों की राजनीति के लिए जनता और लोकतंत्र की कुर्बानी देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सत्ता की मलाई खाने के लिए ये तीनों दल एक साथ आए हैं।

अधिवेशन को टालने का प्रयास

फड़नवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में एक पद्धति अस्तित्व में आ गई है। अधिवेशन के नजदीक आते ही कोरोना बढ़ने की खबरें आती हैं और इसके नाम पर अधिवेशन को टालने का प्रयास होता है। विपक्ष के नेता ने कहा कि राजनीतिक दल के कार्यालय के उद्घाटन या बार में कितनी ही भीड़ हो, लेकिन केवल अधिवेशन के लिए सरकार का इंकार है। महाविकास आघाड़ी सरकार ने लोकतंत्र को समेटने का नया तरीका अपनाया है। हमने विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की भी मांग की। वह चुनाव अभी हुआ नहीं है। सरकार की भूमिका संविधान द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने की नहीं लगती है।

सरकार से जनता बेहद नाराज

महाविकास आघाड़ी सरकार में अस्थिरता के मुद्दे पर किए गए सवाल के जवाब में फड़नवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री नाराज हैं, यह जानकारी मुझे नहीं है, लेकिन राज्य की जनता इस सरकार से बेहद नाराज है। ये सभी सत्ता की मलाई खाने के लिए एकत्रित हुए हैं। बाहर से कुछ भी दिखाने की कोशिश करने के बावजूद वे अंदर से एक हैं। दिल्ली में तीसरा मोर्चा बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 2019 में इससे अधिक नेता पश्चिम बंगाल में हाथ में हाथ डाले एक साथ खड़े हुए थे, लेकिन परिणाम सभी जानते हैं। इसका कोई फायदा नहीं होगा। 2024 में नरेंद्र मोदी पहले की अपेक्षा अधिक सीटों से चुनकर आएंगे।  

40 साल बाद फिर शराब के लाइसेंस!

फड़नवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में मंदिर बंद हैं, लेकिन शराब की दुकानें खुली हैं। महाराष्ट्र में 40 साल पहले शराब के नए लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था बंद कर दी गई थी। 70 के दशक में विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन अब दोबारा लाइसेंस जारी करने की बात हो रही है। फड़नवीस ने कहा कि उनके पास पुख्ता जानकारी है कि यह प्रस्ताव वित्त विभाग तक पहुंच गया है।


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