अब सांसों की लय बिगाड़ने लगा फाइब्रोसिस

भागलपुर                                                  

कोरोना से जंग जीत चुके लोगों को अब फाइब्रोसिस सताने लगा है। इस बीमारी से जूझ रहे लोगों का फेफड़ा सिकुड़ रहा है। इसकी वजह से कोरोना संक्रमण न होने के बावजूद उनके शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है। इससे उन्हें सांस फूलने की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। कई में तो नौबत ऑक्सीजन देने तक पहुंच जा रही है। मायागंज अस्पताल की इमरजेंसी में ऐसे नौ मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनके फेफड़े के सिकुड़ने के कारण उन्हें सांस फूलने की दिक्कत थी। 

मायागंज अस्पताल टीबी एंड चेस्ट विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शांतनु कुमार घोष बताते हैं कि बीते दस दिनों में फाइब्रोसिस के मरीजों की संख्या में दोगुने से ज्यादे की वृद्धि हुई है। दस दिन पहले तक अस्पताल में फाइब्रोसिस के चार मरीज भर्ती थे, लेकिन अब यह संख्या नौ पर पहुंच चुकी है। क्लीनिक में हर रोज फाइब्रोसिस के तीन से चार मामले जांच में पाये जा रहे हैं। इसके अलावा करीब तीन से चार दर्जन फाइब्रोसिस के मरीजों का घर पर ही इलाज चल रहा है। इन मरीजों का जब सिटी स्कैन कराया गया तो एचआरसीटी 12 से 16 के बीच आ रही है। अगले एक से दो माह में फाइब्रोसिस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। 

फेफड़े की आंतरिक दीवारें हो जाती हैं सख्त 

टीबी एंड चेस्ट विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शांतनु कुमार घोष ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीजों में यह समस्या लगातार सामने आ रही है। कोरोना की पहली लहर में भी पोस्ट कोविड मरीजों में यह बीमारी पायी गयी थी। अब दूसरी लहर में ठीक हो चुके लोगों में पहली लहर की तुलना में ज्यादा मिल रहे हैं। कारण कोरोना के डेल्टा वायरस ने संक्रमितों के फेफड़े पर ज्यादा अटैक किया है। फाइब्रोसिस के मरीजों के फेफड़े अपने सामान्य आकार की तुलना में सिकुड़ जाते हैं। इसकी आंतरिक दीवारें सख्त हो जाती है, जिससे फेफड़ा आसानी से फैल-सिकुड़ नहीं पाता है, जिससे फेफड़े में फाइब्रोसिस बनने लगता है। 


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