काम नहीं करने वालों को बाहर निकालेगी भाजपा

मेरठ

भाजपा के बूथ से लेकर मंडल, जिले के सभी पदाधिकारी सरकार और संगठन के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करें। 2017 और 2019 से अब तक प्रदेश और केंद्र सरकार के कार्यों को आम लोगों तक पहुंचाएं। संगठन में काम करने वालों, सक्रिय भागीदारी बढ़ाने वालों को आगे बढ़ाएं। जो पदाधिकारी निष्क्रिय हैं उनकी छुट्टी करें। सभी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल और प्रदेश सह प्रभारी संजीव चौरसिया ने पश्चिम क्षेत्र के जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों से ये बातें कहीं। 

उन्होंने जिला पंचायत के नतीजों पर चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि जिला पंचायत के नतीजे आशा के अनुरूप नहीं हैं, लेकिन कभी भी जिला पंचायत का चुनाव इस तरह पार्टी स्तर पर नहीं लड़ा गया। अब सभी लोग आगे की तैयारी में जुट जाएं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से दो टूक कहा कि अब सब कुछ विधानसभा चुनाव है। तैयारियों में जुट जाएं। अब पार्टी पदाधिकारियों का सारा काम विधानसभा चुनाव है। सभी मोर्चा, प्रकोष्ठ के रिक्त पदों पर तत्काल भरने की कार्रवाई की जाए। सभी अपनी जिम्मेदारी को समझकर काम को आगे बढ़ाएं। अब पार्टी का एकमात्र एजेंडा मिशन-2022 है। बैठक को प्रदेश सह संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, क्षेत्रीय प्रभारी एवं प्रदेश के महामंत्री जेपीएस राठौर ने भी संबोधित किया। संचालन क्षेत्रीय महामंत्री डाॅ. विकास अग्रवाल ने किया। 

पंचायत चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और किसान आंदोलन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। कोरोना काल और पंचायत चुनावों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका का भी फीडबैक मांगा गया। इसके साथ ही सेवा ही संगठन की भी समीक्षा हुई। प्रदेश संगठन महामंत्री ने विधानसभा चुनाव को लेकर जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों से चर्चा की। यह भी चर्चा हुई कि पार्टी 14 जिलों में पंचायत अध्यक्ष बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसके लिए जातिगत समीकरण साधने पर खास जोर रहेगा। नाम जो भी तय हो सर्वसम्मति से किया जाए। इसका फायदा विधानसभा चुनावों में भी मिल सके, ऐसी रणनीति बने। पंचायत चुनाव में मेरठ समेत कुछ जिलों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन पर चिंता जताई गई। इसके पीछे टिकट बंटवारे में हुई चूक और मंडल, जिला स्तर पर बनी समितियों का कार्य बेहतर नहीं होना बड़ी वजह मानी गई। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि मंडल और जिले के पदाधिकारी जनप्रतिनिधियों के प्रभाव में आ गए, लेकिन वो अपने चेहरों को जीत नहीं दिला सके। कोरोना संक्रमण के दौरान पीड़ित कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।


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