कोवैक्सीन-कोविशील्ड में पावर की लड़ाई


नई दिल्ली

भारत में इस्तेमाल की जा रहीं कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के असर पर हाल में आई एक स्टडी पर आपत्ति जताने के बाद भारत बायोटेक ने अपनी वैक्सीन के फोर्थ फेज ट्रायल का ऐलान किया है। इसके जरिए कंपनी अपनी वैक्सीन कोवैक्सीन की रियल-वर्ल्ड इफेक्टिवनेस यानी वैक्सीनेट हो चुके लोगों में टीके के असल असर की जांच करेगी। दरअसल, हाल ही में आई एक स्टडी में कोवैक्सीन को कोविशील्ड के मुकाबले कम असरदार बताया गया है। भारत बायोटेक ने इस स्टडी को अवैज्ञानिक और पूर्वाग्रह पर आधारित बताकर खारिज किया है। कंपनी ने यह भी ऐलान किया है कि वह जुलाई में कोवैक्सीन के थर्ड फेज के क्लीनिकल ट्रायल के डेटा को सार्वजनिक करेगी।

दरअसल, कोलकाता-बेस्ड एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉक्टर अवधेश कुमार सिंह ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन के इम्यून रेस्पॉन्स की तुलना करते हुए स्टडी की थी। स्टडी के मुताबिक, कोवैक्सीन के मुकाबले कोविशील्ड शरीर में ज्यादा एंटीबॉडी बना रही है। 

यानी कोविशील्ड के मुकाबले कोवैक्सीन कम असरदार है। इस स्टडी को लेकर डॉक्टर अवधेश कुमार सिंह और भारत बायोटेक के बिजनस डिवेलपमेंट हेड रैच्स एल्ला के बीच ट्विटर वॉर भी देखने को मिला। दोनों के बीच छिड़े ट्विटर वॉर के बीच तमाम ट्विटर यूजर्स ने भारत बायोटेक से कोवैक्सीन के तीसरे फेज के क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा को सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

भारत बायोटेक ने स्टडी को किया खारिज

भारत बायोटेक ने स्टडी को कमियों वाला बताया है। कंपनी ने कहा कि स्टडी न तो सांख्यिकी पर आधारित है और न ही वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई है। यह पहले से तय परिकल्पना है।

चौथे फेज के ट्रायल से पता चलेगा असल असर: भारत बायोटेक

भारत बायोटेक के मुताबिक चौथे फेज के ट्रायल से न सिर्फ कोवैक्सीन की रियल-वर्ल्ड इफेक्टिवनेस को जांचने में मदद मिलेगी बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि यह सभी वैज्ञानिक और सुरक्षा मानकों पर कितनी खरी है। कपंनी ने कहा कि जनवरी मध्य से ही वैक्सीनेशन जारी है और अब तक लाखों डोज लगाए जा चुके हैं। इसलिए जल्द ही हमारे पास एक विश्वसनीय और विशाल डेटा मौजूद होगा।


Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget