उत्तराखंड में कोरोना से हुई मौतों का होगा ऑडिट

नैनीताल हाईकोर्ट ने दिए निर्देश


नैनीताल

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से राज्य में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों का ऑडिट कराने को कहा है। इसके साथ कोर्ट ने दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में घर-घर जाकर टीकाकरण की संभावना का पता करने को कहा है। राज्य की महामारी से निपटने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक वर्मा ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या समाज कल्याण विभाग की मदद से एक जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया जा सकता है। ऐसे लोग जिनका आईडी कार्ड नहीं होने से टीकाकरण नहीं हो पा रहा है उनकी जानकारी इकट्ठा कर सके। 

कोर्ट ने राज्य सरकार से दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों के लोगों तक प्राथमिकता के आधार पर एक प्रणाली बनाने की संभावना तलाशने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने घर-घर जाकर सर्वे करने के लिए आशा स्वयंसेवकों, होमगार्डों और नर्सों का एक पैनल बनाने का सुझाव दिया।

वेंटिलेटर और आईसीयू उपकरणों का भी हो ऑडिट

राज्य को दूसरी लहर के दौरान कोरोना ​​​​से हुई मौतों का ऑडिट करने के लिए कहने के अलावा, अदालत ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध वेटिलेटर और आईसीयू उपकरणों का ऑडिट करने के लिए भी कहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से यह पता लगाया जा सकेगा कि कितने वेंटिलेटर और उपकरण ऐसे हैं जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा था कि हमने कई बार कहा कि यह अनिवार्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि देश में बहुत सारे लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। सरकार ने मांग सुनी, लेकिन पूरी नहीं सुनी। अभी सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, लेकिन निजी अस्पताल के लिए है। हम फिर से कहना चाहते हैं कि सभी जगह को-विन पंजीकरण अनिवार्य नहीं होना चाहिए।


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